श्रावण मास में शिवभक्ति चरम पर होती है और इस दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। यह पावन महीना इस वर्ष 11 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगा। शिव जी को जल, बेलपत्र, धतूरा और भांग विशेष रूप से प्रिय हैं, लेकिन कुछ फल ऐसे हैं जिन्हें शिवलिंग पर अर्पित करना धार्मिक रूप से वर्जित माना गया है। अगर अज्ञानवश ये फल चढ़ा दिए जाएं, तो पूजा का फल कम हो सकता है या भगवान शिव अप्रसन्न भी हो सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे फलों और वस्तुओं के बारे में जिन्हें शिवलिंग पर अर्पित करने से बचना चाहिए:
ये फल शिवलिंग पर न चढ़ाएं:

1. नारियल
नारियल समुद्र मंथन से उत्पन्न हुआ और इसे देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। लक्ष्मी जी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं, इसलिए नारियल अर्पण को विष्णु पूजा के समान माना जाता है, जो शिव पूजा में अनुचित है।

2. केला
पुराणों के अनुसार, केले के वृक्ष की उत्पत्ति शिव के रौद्र रूप और शाप से जुड़ी है। इसलिए इसे शिवलिंग पर अर्पित नहीं किया जाता।

3. अनार
संपूर्ण अनार शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए, हालांकि अनार के रस से अभिषेक करना धार्मिक रूप से मान्य है।
4. जामुन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जामुन को पूर्णतः शुद्ध नहीं माना गया है, इसलिए इसे शिव पूजा में नहीं शामिल किया जाता।
5. तुलसी पत्ते
तुलसी देवी लक्ष्मी जी की प्रतीक हैं और विष्णु प्रिय मानी जाती हैं, इसलिए इन्हें शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित है।

इन वस्तुओं से भी बचें:
केवड़ा फूल: शिवपुराण में बताया गया है कि केवड़ा फूल ने एक बार असत्य का साथ दिया था, जिसके कारण शिवजी ने इसे श्रापित किया।
स्त्रियों के श्रृंगार की वस्तुएं (कुमकुम, सिंदूर आदि): शिव वैराग्य के देवता हैं, इसलिए श्रृंगार सामग्री चढ़ाना अशोभनीय माना गया है।
शिव की पूजा में सरलता है श्रेष्ठता
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए महंगे प्रसाद या विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। वे सच्ची श्रद्धा से अर्पित किए गए जल को भी स्वीकार कर लेते हैं। अतः शिव पूजा में शास्त्रों के अनुसार वर्जित वस्तुओं से परहेज करें और भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करें।



