16 जुलाई: यमन में फांसी की राह पर भारतीय नर्स निमिषा—हत्या मामले में सजा तय”

Madhya Bharat Desk
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केरल के पालाक्कड़ जिले की 37–38 वर्षीय भारतीय नर्स निमिषा प्रिय को यमन में हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है। यमन के होथी-शासित सना के जेल में बंद इन पर अदालत ने 16 जुलाई 2025 को तारीख तय की है, जिस पर उन्हें फांसी दी जा सकती है ।

1. आरोप और घटना का क्रम:

जुलाई 2017 में निमिषा ने अपने स्थानीय साथी तلال अब्दो महदी को ओवरडोज़ देकर मार डाला, जिसका आरोप था कि उन्होंने उसका पासपोर्ट कब्जे में ले लिया और मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न किया ।

आरोप है कि उन्होंने उसे नींद की दवाएं देकर बेहोश करने की योजना बनाई थी, लेकिन इससे उसकी मृत्यु हो गई ।

इसके बाद एक सहयोगी ने शव को टुकड़ों में काटकर पानी की टंकी में फेंका ।

2. न्यायिक प्रक्रिया और सजा:

2018 में यमन की एक निचली अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई, जिसे 2023 में सुप्रीम कोर्ट (हौथी सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल) ने बरकरार रखा ।

दिसंबर 2024 में यमन के राष्ट्रपति रशाद अल–अलिमी ने सजा को मंजूरी दी ।

3. अंतरराष्ट्रीय व घरेलू प्रयास:

भारत सरकार, विशेषकर विदेश मंत्रालय (MEA), मामले पर सतर्क नज़र रखे हुए है और यमन की होथी सरकार से संवाद भी बना हुआ है ।

सामाजिक कार्यकर्ता सैमुएल जेरोम बास्करण समेत गैरसरकारी संगठन “सेव निमिषा प्रिय एक्शन काउंसिल” इसके लिए लगातार प्रयासरत हैं ।

उन्हें क्षमा अथवा ‘दिय्यत’ (रक्त-मुआवजे) के विकल्प पर परिवार से समझौता करने की कोशिश की जा रही है—प्रस्तावित राशि लगभग 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं मिला ।

4. स्थिति की गहनता:

यमन के होथी शासकों के तहत भारतीय दूतावास का सीमित पहुंच है, इसलिए बातचीत में बाधा बनी हुई है ।

अगर वार्ता सफल होती है और पीड़ित परिवार क्षमा कर दे तो सजा टाली जा सकती है। बदलाव न होने पर 16 जुलाई निर्धारित रूप से सजा का दिन होगा ।

5. व्यक्तिगत और पारिवारिक दृष्टिकोण:

निमिषा कड़ी चुनौतियों के बीच फंसी रही: उसने परिवार के साथ लगा गरीबों सहित पढ़ाई-लिखाई की, 2008 में यमन संग जुड़ी और 2015 में वहां एक क्लिनिक खोली ।

हालत बिगड़ने के बाद पति व बेटी भारत लौट आए, लेकिन वह सना में रह गई ।

 

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