इंडोनेशिया में जंगलों में आग लगाने वाले 44 गिरफ्तार, सरकार ने बरसाई सख्ती और कराई कृत्रिम बारिश

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

इंडोनेशिया के जंगलों में बार-बार लगने वाली आग अब केवल एक पर्यावरणीय आपदा नहीं रही, बल्कि यह मानव जीवन, स्वास्थ्य और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। लगातार फैल रहे जहरीले धुएं और बिगड़ते हालात को देखते हुए इंडोनेशियाई सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए जंगलों और पीटलैंड्स (नमी युक्त दलदली जमीन) में आग लगाने के आरोप में 44 लोगों को गिरफ्तार किया है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (BNPB) के प्रमुख सुहरयांतो ने बताया कि आगजनी की घटनाएं केवल प्राकृतिक नहीं हैं, बल्कि बड़ी संख्या में लोग जानबूझकर भूमि साफ करने के लिए आग लगा रहे हैं। सरकार को उम्मीद है कि इन गिरफ्तारियों से सख्त संदेश जाएगा और ऐसी घटनाएं रुकेंगी।

10 साल तक की सजा का प्रावधान

इन 44 आरोपियों में एक महिला भी शामिल है। सभी को मंगलवार को रियाउ प्रांत की राजधानी पेकनबारू में मीडिया के सामने पेश किया गया, जहां वे नारंगी जेल की वर्दी और हथकड़ी में दिखे। उनके खिलाफ पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है।

सबसे अधिक प्रभावित इलाके

रियाउ प्रांत के रोकन हिलिर और रोकन हुलु जिले आग की चपेट में हैं, जहां लगभग 500 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। घना धुआं इतना फैल चुका है कि दृश्यता एक किलोमीटर से भी कम रह गई है। सरकार ने आग बुझाने के लिए कृत्रिम वर्षा का सहारा लिया है। 25 जुलाई तक नमक डालकर बादलों से वर्षा कराने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

अंतरराष्ट्रीय विवाद की जड़

हर साल सूखे के मौसम में सुमात्रा और बोर्नियो द्वीपों पर लगने वाली आग से निकलने वाला धुआं सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड तक फैलता है। 2023 में भले ही इंडोनेशिया ने मलेशिया के आरोपों को खारिज किया हो, लेकिन अतीत में इस धुएं के लिए माफी भी मांग चुका है। अब सरकार की इस सख्ती से उम्मीद की जा रही है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव में कमी आएगी।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment