मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। बीते 24 घंटों में यह संघर्ष केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह सीधे तौर पर ऊर्जा संसाधनों को निशाना बनाने वाले ‘ऑयल वॉर’ में तब्दील होता दिख रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड पर इजरायल द्वारा हमले के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने क़तर के रणनीतिक रूप से अहम रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर बैलिस्टिक मिसाइलों से जवाबी कार्रवाई की। यह इलाका वैश्विक स्तर पर LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) उत्पादन और निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।
क़तर के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान ने कुल पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि एयर डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर मिसाइलों को रास्ते में ही निष्क्रिय कर दिया, लेकिन एक मिसाइल रास लाफान में गिर गई। इस हमले के बाद इलाके में भीषण आग लग गई और भारी नुकसान की खबर है।
ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी QatarEnergy ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हमले से प्लांट को गंभीर क्षति पहुंची है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
घटना के बाद क़तर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने इसे ‘गंभीर और गैर-जिम्मेदाराना कदम’ करार देते हुए ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। क़तर सरकार ने ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों समेत कई लोगों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर दिया है और उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऊर्जा ठिकानों पर इस तरह के हमले जारी रहे, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतों में उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।







