मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और इस्राइल का ईरान के साथ संघर्ष अब छठे हफ्ते में पहुंच चुका है। हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की कोशिशें फिलहाल नाकाम होती दिख रही हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं।
सोमवार को व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को खत्म कराने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके मुताबिक, इस पहल से करोड़ों लोगों की जान बचाई जा सकी। हालांकि, भारत सरकार पहले भी ऐसे दावों को खारिज कर चुकी है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने केवल भारत-पाक ही नहीं, बल्कि दुनिया के आठ बड़े संघर्षों को शांत कराने में भूमिका निभाई है। उन्होंने यह दावा करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का हवाला दिया और कहा कि उनकी कोशिशों से लाखों-करोड़ों लोगों की जिंदगी बची। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जताया कि उन्हें अब तक नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला।
ईरान के साथ चल रहे संघर्ष पर भी ट्रंप ने सख्त रुख दिखाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तय समय सीमा तक समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका कड़ा सैन्य कदम उठा सकता है। उनके बयान में यह भी शामिल था कि ईरान के बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
इस दौरान ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि NATO सहित कई देशों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया। ट्रंप ने विशेष रूप से जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका इन देशों की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाता है, लेकिन बदले में सहयोग नहीं मिल रहा।
मध्य पूर्व में बढ़ते इस तनाव और ट्रंप के लगातार आ रहे बयानों ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में हालात काबू में आते हैं या यह संघर्ष और गहराता है।



