दुर्ग जिले के पुलगांव बाल संप्रेक्षण गृह में सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बीती रात यहां से 7 नाबालिग आपचारी मौका मिलते ही फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस हरकत में आई और 24 घंटे के भीतर 4 बच्चों को पकड़ लिया, लेकिन 3 नाबालिग अब भी लापता हैं। आशंका है कि ये तीनों जिले की सीमा पार कर चुके हैं, जिस वजह से पुलिस की चिंता और बढ़ गई है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह मामला कोई पहली बार नहीं हुआ है। इसी महीने 3 नवंबर को भी 3 नाबालिग यहां की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताकर भाग निकले थे। महज 26 दिन के भीतर दूसरी बार हुई इस घटना ने विभाग की जिम्मेदारी और सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक बच्चे अक्सर उसी पुराने तरीके से भाग रहे हैं—दीवार फांदकर पीछे के हिस्से से बाहर निकल जाना। लगातार होने वाली इन घटनाओं से पुलिस भी परेशान है, क्योंकि हर बार नाबालिगों की तलाश में भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
चार बच्चे तो आस-पास के इलाकों में मिल गए, लेकिन बाकी तीनों के जिले से बाहर चले जाने की खबर ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरी घटना पर महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी पूरी तरह चुप हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी राजकुमार जांभुलकर और अधिकारी अजय साहू को कई बार कॉल करने के बाद भी न तो उन्होंने फोन उठाया और न ही किसी तरह की जानकारी साझा की।
लगातार होने वाली लापरवाही और प्रशासन की चुप्पी ने बाल सुधार गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।







