बालोद।बालोद जिले में सागौन की अवैध कटाई और तस्करी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। बिना चालान और वैध दस्तावेजों के सागौन की लकड़ी रात के अंधेरे में सरकारी वाहन से लाए जाने का खुलासा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि यह लकड़ी बालोद वनोपज जांच नाका के रजिस्टर में दर्ज ही नहीं की गई।
काष्ठागार प्रभारी आरपी मंडावी ने बताया कि 30 अक्टूबर 2025 की रात डौंडी क्षेत्र से सरकारी वाहन में भरकर लाई गई सागौन की लकड़ी बिटेझर से लाई गई थी, लेकिन उसके साथ कोई भी वैध कागजात मौजूद नहीं थे। इसके बावजूद वनोपज जांच नाका पर उसकी एंट्री नहीं की गई।
प्रकरण दबाने के लिए साढ़े तीन लाख की रिश्वत का आरोप
इस पूरे मामले में रिश्वतखोरी का गंभीर आरोप भी सामने आया है। किल्लेकोड़ा निवासी राममिलन ने 9 नवंबर को विभागीय मंत्री केदार कश्यप से शिकायत करते हुए बताया कि प्रकरण दर्ज न करने के बदले वनरक्षक द्वारा साढ़े तीन लाख रुपये की मांग की गई थी।
शिकायत के अनुसार, 2 फरवरी 2024 को ग्रामीण बिना दस्तावेज लकड़ी लेकर जा रहे थे, तभी झरनटोला बीट के वनरक्षक और क्षेत्र सहायक ने वाहन रोककर जांच की। दस्तावेज न होने पर वाहन को डौंडीलोहारा ले जाया गया। अगले दिन अधिकारी वेद प्रकाश साहू ने पैसे देने पर कार्रवाई न करने की बात कही। 13 फरवरी को चौकीदार पूनाराम यादव को साढ़े तीन लाख रुपये सौंपे गए, जिसके बाद प्रकरण दर्ज नहीं किया गया।
वन विभाग के ही अधिकारी कटाई और फर्नीचर निर्माण में शामिल
पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी सागौन के पेड़ अवैध रूप से कटवाकर सरकारी वाहनों का दुरुपयोग कर रहे थे। कटे हुए पेड़ों की लकड़ी निजी फर्नीचर मार्ट तक पहुंचाई गई, जहां उससे टी-टेबल, ड्रेसिंग टेबल और अन्य फर्नीचर तैयार किए गए।
सूत्रों के मुताबिक, इन फर्नीचरों को किसी बड़े अधिकारी के बंगले में भेजने की तैयारी थी। हालांकि, वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने छापेमारी कर सिवनी स्थित विश्वकर्मा फर्नीचर मार्ट से अवैध सागौन लकड़ी और तैयार फर्नीचर जब्त किए।

काष्ठागार से आरा-मिल तक पूरा खेल
अवैध लकड़ी पहले वन विभाग के काष्ठागार में रखी गई, फिर आरा-मिल से चिराई कर फर्नीचर बनाया गया। लकड़ी के परिवहन की जिम्मेदारी डौंडी रेंजर जीवनलाल भांडेकर को सौंपी गई थी, जबकि बीट गार्ड ईश्वर साहू वाहन से लकड़ी पहुंचाने में शामिल था।
शिकायत के बाद रायपुर से आई विशेष जांच टीम ने काष्ठागार और कारपेंटर के ठिकानों पर दबिश दी। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ अधिकारी सहयोग से बचते रहे और एसडीओ जीवनलाल सिन्हा ने टीम को अपेक्षित जानकारी नहीं दी।
पर्यावरण प्रेमियों ने DFO को सौंपा ज्ञापन
बालोद और धमतरी जिले के पर्यावरण प्रेमियों ने वन मंडलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब जंगलों की रक्षा करने वाले ही अवैध कटाई में शामिल होंगे तो पर्यावरण कैसे सुरक्षित रहेगा।
ज्ञापन सौंपने वालों में भोज साहू (देवरी), वीरेन्द्र सिंह (दल्लीराजहरा), प्रेमशंकर चौबे (धमतरी) और वैभव जगने शामिल रहे।







