रायपुर।नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRANVP) के 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के सड़क मरम्मत और नवीनीकरण टेंडर पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) रायपुर सेंटर ने आरोप लगाया है कि टेंडर की तकनीकी शर्तें ऐसी बनाई गई हैं, जिससे किसी खास ठेकेदार को फायदा मिल सकता है।
एसोसिएशन ने NRANVP अध्यक्ष को पत्र लिखकर NIT क्रमांक 06/SRCS/EEC-III/CE/NRANVP/2025-26, दिनांक 24 अप्रैल 2026 में तय तकनीकी पात्रता नियमों में बदलाव की मांग की है।
क्या है विवाद?
NRANVP ने नवा रायपुर अटल नगर की सिटी और सेक्टर स्तर की सड़कों के सुदृढ़ीकरण और रिन्यूअल के लिए टेंडर निकाला है। लेकिन इसमें रखी गई एक तकनीकी शर्त विवाद की वजह बन गई है।
टेंडर में कहा गया है कि ठेकेदार के पास एक ही प्रोजेक्ट में इन सभी कामों का अनुभव होना चाहिए—
- कम से कम 4-लेन बिटुमिनस सड़क का नवीनीकरण
- मिलिंग वर्क
- पुराने बिटुमिनस लेयर का प्रोफाइल सुधार
- रोड फर्नीचर का काम
यानी ठेकेदार ने ये सारे काम एक ही परियोजना में किए हों, तभी वह पात्र माना जाएगा।
“शर्तें जरूरत से ज्यादा सख्त”
BAI रायपुर सेंटर का कहना है कि ये नियम बहुत ज्यादा सीमित और खास तरह से तैयार किए गए लगते हैं। इससे कई अनुभवी सड़क निर्माण कंपनियां टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो सकती हैं।
एसोसिएशन के मुताबिक, कई ठेकेदार NHAI, MORTH, PWD और दूसरी सरकारी एजेंसियों के बड़े सड़क और हाईवे प्रोजेक्ट पूरे कर चुके हैं, लेकिन सिर्फ इसलिए बाहर हो जाएंगे क्योंकि उन्होंने ये सारे काम एक ही प्रोजेक्ट में नहीं किए।
“किसी खास ठेकेदार को फायदा पहुंचाने की कोशिश?”
एसोसिएशन ने सबसे बड़ा सवाल यही उठाया है कि कहीं ये पात्रता शर्तें किसी तय ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए तो नहीं बनाई गईं।
पत्र में कहा गया है कि सामान्य सरकारी टेंडरों में इस तरह की शर्तें कम ही देखने को मिलती हैं और इससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है।
नियम बदलने की मांग
बिल्डर्स एसोसिएशन ने मांग की है कि तकनीकी पात्रता नियमों को आसान और व्यावहारिक बनाया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा योग्य और अनुभवी ठेकेदार निविदा में हिस्सा ले सकें।
इसके लिए एसोसिएशन ने NRANVP से Corrigendum या Amendment जारी कर शर्तों में बदलाव करने की अपील की है।
टेंडर प्रक्रिया पर बढ़ी चर्चा
इस पूरे मामले के बाद निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये नियम प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं या फिर किसी खास कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए?
अगर समय रहते तकनीकी शर्तों में बदलाव नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह मामला और ज्यादा तूल पकड़ सकता है।



