भूपेश बघेल के शिक्षा मॉडल पर ब्रेक?

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ में शिक्षा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। स्वामी आत्मानंद विद्यालय, जिन्हें कभी मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मॉडल के रूप में पेश किया गया था, अब वहां पढ़ने वाले छात्रों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से वार्षिक शुल्क देना होगा।

राज्य सरकार के इस फैसले के तहत अब वही फीस लागू होगी, जो अन्य शासकीय और अनुदान प्राप्त विद्यालयों में निर्धारित है। यानी कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों को 410 रुपये और कक्षा 11वीं-12वीं के छात्रों को 445 रुपये सालाना शुल्क देना होगा।

सवाल यहीं से शुरू होता है

क्या यह ‘समानता’ है या ‘सुविधा’ में कटौती?

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में शुरू किए गए करीब 750 आत्मानंद स्कूलों ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाया था। इन स्कूलों ने न सिर्फ गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को निजी स्कूलों के महंगे खर्च से राहत दी, बल्कि बच्चों के बेहतर परिणाम और सर्वांगीण विकास की मिसाल भी पेश की।

हालात ऐसे थे कि इन स्कूलों में एडमिशन के लिए लंबी लाइनें लगती थीं, और जनप्रतिनिधियों तक को सिफारिश करनी पड़ती थी। यहां के विद्यार्थियों ने अन्य विद्यालयों की तुलना में बेहतर परिणाम लाए है। यह मॉडल तेजी से लोकप्रिय हुआ और सरकारी शिक्षा की छवि को मजबूत किया।

शिक्षा मॉडल के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में शुरू हुए आत्मानंद स्कूल की पूरे देश में सराहना हुई और विदेशों में भी इसे शिक्षा का बहुत अच्छा मॉडल के रूप में सराहा गया।

लेकिन अब वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिए जा रहे फैसलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि पहले स्कूलों की आर्थिक सहायता में कमी आई, जिससे बुनियादी संसाधनों– चाक, डस्टर, रंगाई-पुताई और फर्नीचर तक की व्यवस्था प्रभावित हुई।

इसके साथ ही, आत्मानंद स्कूलों के नाम बदलकर ‘पीएम श्री स्कूल’ करने की चर्चा ने भी विवाद को हवा दी। कुछ स्कूलों के नाम बदले गए, जबकि कई आज भी पुराने नाम के साथ सीमित संसाधनों में संचालित हो रहे हैं।

अब फीस लागू करने के फैसले ने इस बहस को और तेज कर दिया है। लोग कह रहे हैं “पहले शिक्षा मुफ्त कर लोकप्रियता मिली, अब फीस लगाकर ‘व्यवस्था’ सुधारी जा रही है!” यह फैसला गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक झटका हो सकता है।

असली सवाल अभी भी कायम है क्या ‘सुशासन’ का मतलब सुविधाओं को बनाए रखना है या उन्हें धीरे-धीरे सीमित करना?

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