रायपुर/नया रायपुर। छत्तीसगढ़ में “महतारी अस्मिता” को लेकर चल रहा आंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। आंदोलनकारियों ने तीसरे चरण की रथ यात्रा को लेकर बड़ा ऐलान किया है। इस यात्रा की रणनीति और कार्ययोजना 16 अप्रैल को तैयार की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, नया रायपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मंदलौर कठिया से इस अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी है। 16 अप्रैल को छत्तीसगढ़ी भवन, हांडीपारा में बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें रथ यात्रा के तीसरे चरण की विस्तृत योजना बनाई जाएगी। इस चरण को “छत्तीसगढ़ियों के आत्मसम्मान का संघर्ष” बताया जा रहा है।
इस आंदोलन की पृष्ठभूमि में 28 नवंबर 2025 की वह घटना है, जब महासमुंद जिले में कथित तौर पर छत्तीसगढ़ महतारी को तुमगांव थाने में बंद किए जाने का आरोप लगाया गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि इस घटना के बाद से पूरे प्रदेश में लोगों में आक्रोश है और गांव-गांव, शहर-शहर जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है।
आंदोलन का नेतृत्व कई सामाजिक और स्थानीय नेताओं द्वारा किया जा रहा है, जिनमें जागेश्वर प्रसाद, अनिल दुबे, दीनदयाल वर्मा, भवन लाल पटेल, जी.पी. चंद्राकर, लालाराम वर्मा, चेतन देवांगन, विमल ताम्रकार, शिवनारायण ताम्रकार समेत 200 से अधिक सदस्य शामिल हैं।
आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि “छत्तीसगढ़ महतारी” की अस्मिता के साथ अन्याय हुआ है और यह सवाल अब जनआंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ निजी संस्थाओं और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही है।
नेताओं का कहना है कि यह रथ यात्रा केवल विरोध नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई है। आगामी दिनों में रथ यात्रा को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की सभाओं तक ले जाने की भी रणनीति बनाई जा रही है।
आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक लालाराम वर्मा ने कहा कि “छत्तीसगढ़िया समाज अपने सम्मान के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक न्याय नहीं मिल जाता।”







