छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार बदहाली की ओर बढ़ रही है। अस्पतालों की दुर्दशा, दवाओं की कमी और अमानक दवाओं की सप्लाई आम बात बन चुकी है। रोज़ाना अखबारों में विभाग की लापरवाहियों की खबरें छपती हैं, लेकिन सुधार के ठोस प्रयास कहीं नजर नहीं आते।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल पर लगातार आरोप लगते रहे हैं कि उनकी प्राथमिकता मरीजों की तकलीफें नहीं, बल्कि खरीदी में होने वाला कमीशन है। मंत्री और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार का जाल इतना गहरा हो चुका है कि आम जनता की समस्याओं पर ध्यान देने वाला कोई नहीं बचा।
अमानक और नकली दवाओं के चलते न जाने कितने लोगों की जानें जा चुकी हैं, लेकिन शासन-प्रशासन में बैठे जिम्मेदारों को कोई फर्क नहीं पड़ता। न तो मंत्री जवाबदेह हैं और न ही अधिकारी। सवाल उठता है कि आखिर जनता की जान से इतना बड़ा खिलवाड़ कब तक जारी रहेगा?
CGMSC से लेकर जिला अस्पतालों तक एजेंटों का नेटवर्क सक्रिय है। हर खरीदी पर नजर रखने वाले विशेष लोग तैनात हैं, लेकिन मरीजों की तकलीफों का हिसाब रखने वाला कोई नहीं। स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही का आलम यह है कि जनता को अपने अधिकार के लिए आवाज़ उठानी पड़ रही है।
आज भले ही मंत्री और उनके करीबियों पर कोई आंच नहीं आई हो, लेकिन आने वाले समय में जनता और उनके अपने ही कार्यकर्ता हिसाब मांगेंगे। जनता के धैर्य की परीक्षा लेना नेताओं के लिए भारी साबित हो सकता है।



