महासमुंद विधायक द्वारा महिला किसान का मोबाइल छीने जाने पर न्यायालय जाएगी किसान मोर्चा

Madhya Bharat Desk
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महासमुंद (छत्तीसगढ़)। बीते दिनों महासमुंद में उस वक्त बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब किसानों के एक बड़े समूह के साथ महिला किसानें अपने अधिकारों की मांग को लेकर स्थानीय विधायक से मिलने उनके निवास स्थान पर पहुंची। वहां महिलाओं ने राखी बांधी, चूड़ियां भेंट की और विधायक पर सरकारी, आदिवासी, और वन भूमि हड़पने के आरोप लगाए। किसानों ने यह भी कहा कि विधायक उद्योगपतियों के हित में काम कर रहे हैं और गरीब किसानों की ज़मीनें अवैध रूप से छीन ली गई हैं।

इस दौरान महिला किसानों ने विधायक को चूड़ियां पहनाईं और उनके समक्ष अपनी समस्याओं का ब्योरा रखा। विधायक जी ने यह स्वीकार भी किया कि उनकी सत्ता उद्योगपतियों के हित में काम करने को बाध्य है। महिलाओं के सवालों और विरोध के बाद अचानक माहौल गर्म हो गया। आरोप है कि विधायक के इशारे पर उनके साथ मौजूद असामाजिक तत्वों ने एक महिला किसान का मोबाइल फोन छीन लिया। इस पर किसानों ने तुरंत आपत्ति जताई और अपनी आवाज़ उठाई।

मोबाइल छिनने की घटना के पश्चात् किसानों ने मोबाइल को Google अकाउंट द्वारा लॉक कर दिया। किसान मोर्चा का कहना है कि शुरुआती कोशिशों के बावजूद जब मोबाइल फोन वापस नहीं किया गया, तो उन्होंने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई। पहले सिटी कोतवाली महासमुंद और फिर पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया गया, मगर पुलिस द्वारा कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की गई। बाद में, डीएम और डीजीपी को भी इसकी सूचना दी गई, लेकिन न्याय की कोई उम्मीद नहीं दिखी।

न्याय न मिलने की स्थिति में किसान मोर्चा ने निर्णय लिया कि वह अब न्यायालय का रुख करेगा। छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा ने यह घोषणा की है कि सोमवार, 6 तारीख को महासमुंद के सीजीएम न्यायालय में इस मामले को दर्ज कराया जाएगा। यह पूरी कार्रवाई किसानों द्वारा न्याय पाने का अंतिम प्रयास बताई जा रही है।

किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनिल दुबे ने पुलिस प्रशासन और नेताओं पर भी भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और ड्रग्स कारोबार तक के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ की राजधानी में पुलिस कमिश्नरी की व्यवस्था केवल भ्रष्टाचार और अवैध कमाई के लिए की जा रही है। मुख्यमंत्री और सत्ताधारी नेताओं पर भी किए गए घोटाले और लूट के आरोपों का उल्लेख किया गया। साथ ही पुलिस अधीक्षक, कोतवाली प्रभारी और संबंधित पुलिस अधिकारियों पर संगीन आरोप लगाए गए कि वे सत्ता पक्ष के इशारे पर काम कर रहे हैं तथा अपराध और भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं।

अनिल दुबे और किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया कि किसी भी हालत में संविधान और न्याय के लिए वे लड़ाई जारी रखेंगे और अदालत से न्याय की उम्मीद करेंगे।

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