किसानों की लड़ाई पहुंची सुप्रीम कोर्ट: महासमुंद में ‘समानांतर सड़क’ विवाद ने पकड़ा तूल

Madhya Bharat Desk
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महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में नेशनल हाईवे के समानांतर कथित अवैध सड़क निर्माण से जुड़े मामले ने अब कानूनी रूप से बड़ा मोड़ ले लिया है। इस मामले में दायर याचिका को 23 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट में ई-फाइल किया गया है, जिसे डायरी नंबर 17967/2026 के साथ दर्ज कर लिया गया है।

दायर याचिका “छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा एवं अन्य बनाम प्रदीप कुमार लाल (जीएम टेक कम रीजनल ऑफिसर, रायपुर) एवं अन्य” शीर्षक से है। इससे साफ है कि अब यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष औपचारिक रूप से पहुंच चुका है।

दरअसल, यह पूरा विवाद महासमुंद जिले के ग्राम तुमगांव के पास खसरा नंबर 89, ग्राम कौवाजर क्षेत्र का है, जहां आरोप है कि एक निजी कंपनी द्वारा नेशनल हाईवे के समानांतर सड़क का निर्माण कराया जा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निर्माण निजी उपयोग के उद्देश्य से किया जा रहा था।

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मामले की जानकारी मिलते ही किसान संगठनों और ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया और डायल 112 पुलिस को बुलाकर निर्माण कार्य रुकवाया। इसके बाद नेशनल हाईवे प्राधिकरण के संबंधित कार्यालयों में भी शिकायत दर्ज कराई गई।

किसानों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन ने मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते उन्हें सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा। याचिका में नेशनल हाईवे से जुड़े अधिकारियों और जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।

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