मध्यप्रदेश में ‘तालाब घोटाला’ के आरोप, विपक्ष ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

Madhya Bharat Desk
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मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और तालाब निर्माण योजनाओं में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। आरोप है कि कई जिलों में नए तालाबों के निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कई स्थानों पर नए तालाब अस्तित्व में ही नहीं हैं। कहीं सड़क निर्माण के दौरान बने गड्ढों और नालों को तालाब बताकर भुगतान कर दिया गया, तो कहीं वर्षों पुराने तालाबों को नया निर्माण दर्शाकर सरकारी राशि निकालने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

मामले में यह भी दावा किया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर सरकारी रिकॉर्ड में तालाब दर्ज हैं, जबकि मौके पर उन्हीं स्थानों पर खेती होती मिली। वहीं, कुछ जगह पुराने निर्माणों पर नए साइन बोर्ड लगाकर उन्हें नई योजना का हिस्सा दिखाए जाने और अधिकारियों व ठेकेदारों की कथित मिलीभगत से सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए हैं।

इस पूरे मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश को घोटालों के लिए बदनाम करने के बाद अब “तालाब घोटाला” कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई जगह तालाब नहीं बने, सड़क निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढों को ही तालाब दिखाया गया और पुराने तालाबों को नया निर्माण बताकर सरकारी राशि का उपयोग किया गया। कमलनाथ ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

इधर, इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकारी योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। वहीं, संबंधित विभागों और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल, इन आरोपों की आधिकारिक जांच और पुष्टि होना बाकी है। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला मध्यप्रदेश में जल संरक्षण योजनाओं से जुड़े सबसे बड़े कथित घोटालों में शामिल हो सकता है। सरकार या संबंधित विभाग की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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