ओडिशा में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के बाद सियासी माहौल अचानक गरमा गया है। चुनाव में हार का सामना करने के बाद कांग्रेस ने अब सख्त रुख अपनाते हुए पार्टी लाइन से हटकर वोट करने वाले अपने तीन विधायकों पर बड़ी कार्रवाई की है।
कांग्रेस ने रमेश जेना, दशरथी गमांग और सोफिया फिरदौस को पार्टी से निलंबित कर दिया है। आरोप है कि इन तीनों नेताओं ने पार्टी के निर्देशों की अनदेखी करते हुए भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में मतदान किया।
दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी
इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र काड़ाम ने विधानसभा अध्यक्ष को दो अलग-अलग पत्र भेजे हैं। पहले पत्र में उन्होंने मांग की है कि तीनों विधायकों के खिलाफ दल-बदल कानून (दसवीं अनुसूची) के तहत कार्रवाई शुरू की जाए।
पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि पार्टी व्हिप के बावजूद क्रॉस वोटिंग करना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है। साथ ही इसे मतदाताओं के जनादेश के खिलाफ भी बताया गया है। कांग्रेस ने स्पीकर से अपील की है कि मामले की जांच कर जल्द से जल्द अयोग्यता की प्रक्रिया शुरू की जाए।
अंदरूनी कलह आई सामने
इस घटना ने कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान को भी उजागर कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता करार देते हुए साफ संकेत दिया है कि संगठन में एकजुटता बनाए रखना अब प्राथमिकता है, खासकर आने वाले चुनावों को देखते हुए।
ओडिशा की राजनीति में बढ़ी गर्मी
इस घटनाक्रम के बाद ओडिशा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जहां कांग्रेस अपनी सख्ती के जरिए संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं यह मामला आगे कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर बड़ा मुद्दा बन सकता है।
अब सभी की नजर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है।







