उद्योगों को अडानी को बेचने का षड्यंत्र कर रही सरकार : भूपेश बघेल

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वेदांता प्लांट में हुई औद्योगिक दुर्घटनाओं और उद्योगपतियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सवाल किया कि छत्तीसगढ़ में वर्षों से हुई औद्योगिक दुर्घटनाओं में किसी उद्योग मालिक के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, फिर सक्ती जिले में वेदांता प्लांट हादसे के मामले में केवल उद्योगपति अनिल अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज की गई।

बघेल ने कहा कि रायपुर समेत प्रदेश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी दुर्घटनाएं हुई हैं। उन्होंने कोरबा स्थित वेदांता प्लांट की पुरानी दुर्घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस हादसे में 40 लोगों की मौत हुई थी। उस समय डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री थे, लेकिन क्या तब वेदांता के मालिक अनिल अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी? उन्होंने दावा किया कि किसी भी पावर प्लांट या औद्योगिक हादसे में अब तक मालिकों के खिलाफ एफआईआर नहीं की गई, इसलिए वर्तमान मामले में केवल एक उद्योगपति को निशाना बनाए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीति यही है तो भविष्य में प्रदेश में होने वाली हर औद्योगिक दुर्घटना में संबंधित उद्योग के मालिक के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।

भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला सरकार के एक बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि उनकी चिंता किसी उद्योगपति को बचाने की नहीं है, बल्कि यह है कि प्रदेश के उद्योग औने-पौने दाम में किसी दूसरे उद्योग समूह, विशेषकर अडानी समूह, के हाथों न चले जाएं। उन्होंने कहा कि आशंका है कि सरकार ऐसी परिस्थितियां बना रही है जिससे वेदांता जैसी कंपनियों की संपत्तियां बाद में अडानी समूह खरीद सके।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत द्वारा औद्योगिक दुर्घटनाओं को लेकर पूछे गए प्रश्न का उल्लेख करते हुए बघेल ने कहा कि सरकार ने सदन में स्वीकार किया है कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक हादसों में 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है तथा कई लोग घायल और हताहत हुए हैं। उन्होंने कहा कि इतने मामलों के बावजूद उद्योग मालिकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, जबकि इस बार केवल वेदांता के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिससे सरकार की मंशा पर संदेह पैदा होता है।

बघेल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार उद्योगों को अडानी समूह के पक्ष में ले जाने की साजिश कर रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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