करीब तीन दशक के अंतराल के बाद भारतीय चुनावी व्यवस्था एक बार फिर बड़े मंथन की ओर बढ़ रही है। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित में ‘राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन’ का आयोजन कर रहा है। यह महत्वपूर्ण बैठक 27 साल बाद हो रही है। इससे पहले ऐसा सम्मेलन वर्ष 1999 में आयोजित किया गया था।
इस सम्मेलन में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्त, मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और उनके कानूनी व तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे।
क्या है सम्मेलन का मकसद?
इस पहल का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय और राज्य स्तर के चुनावी निकायों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी बन सके।
बैठक की अध्यक्षता मुख्य चुनाव आयुक्त करेंगे। उनके साथ चुनाव आयुक्त और भी मौजूद रहेंगे।
तकनीक और पारदर्शिता पर रहेगा फोकस
सम्मेलन में जिन अहम मुद्दों पर चर्चा होगी, उनमें शामिल हैं:
- चुनावी प्रक्रियाओं में तकनीकी सुधार
- EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के उपयोग और उसकी सुरक्षा
- मतदाता सूची की शुद्धता और मजबूती
- डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ECINET’ की कार्यप्रणाली और उपयोग
चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी हाल ही में लॉन्च किए गए डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ECINET’ की विस्तृत प्रस्तुति भी देंगे। इस मंच के जरिए चुनाव प्रबंधन को डिजिटल और अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
संवैधानिक आधार
राज्य चुनाव आयोगों की स्थापना संविधान के 73वें और 74वें संशोधन के तहत की गई थी, ताकि स्थानीय निकाय चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संचालित किया जा सके।
यह सम्मेलन प्रशासनिक, कानूनी और तकनीकी स्तर पर समन्वय बढ़ाने के लिए एक संस्थागत संवाद का मजबूत मंच साबित हो सकता है।
क्यों है यह सम्मेलन अहम?
27 वर्षों बाद आयोजित हो रहा यह गोलमेज सम्मेलन चुनावी सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। तेजी से बदलती तकनीक और बढ़ती चुनावी चुनौतियों के बीच यह बैठक भविष्य की चुनाव प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा तय कर सकती है।







