छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस समय तीखी हलचल मच गई जब सामाजिक कार्यकर्ता प्रतीक पाण्डेय ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सीधा और कड़ा पत्र लिखकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख वी श्रीनिवास राव पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप जड़ दिए।
पत्र में लगभग 1000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का उल्लेख करते हुए पाण्डेय ने सवाल उठाया है कि आखिर इतने गंभीर आरोपों के बावजूद संबंधित अधिकारी को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है।
पाण्डेय ने आरोप लगाया कि 8 नवम्बर 2025 को भेजी गई शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय उसे उसी विभागीय तंत्र के हवाले कर दिया गया जो सीधे तौर पर आरोपित अधिकारी के अधीन कार्य करता है।
उनका कहना है कि यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन भी है। शिकायतकर्ता को न तो जांच की प्रगति की जानकारी दी गई और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया गया।
पत्र में वन मंत्री केदार कश्यप की भूमिका पर भी तीखे सवाल उठाए गए हैं। पाण्डेय ने पूछा है कि क्या सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों पर पर्दा डाल रही है, या फिर किसी प्रभावशाली नेटवर्क के दबाव में कार्रवाई से बचा जा रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि पारदर्शी और निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो सरकार की “सुशासन” की छवि को गहरी क्षति पहुंचेगी।
पत्र की प्रतिलिपि राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों और भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी भेजी गई है। फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस पत्र ने प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक नैतिकता पर गंभीर बहस छेड़ दी है |



