छत्तीसगढ़ के वन विभाग में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। ताज़ा घटनाक्रम में, भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर एक सार्वजनिक शिकायत अपील पर उचित कार्यवाही करने और उसकी रिपोर्ट (ATR) सौंपने का निर्देश दिया है।
मुख्य विवाद और आरोप
जन-प्रतिनिधि प्रतीक पाण्डेय ने वर्तमान प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) और वन बल प्रमुख श्री वी. श्रीनिवास राव के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाए हैं। मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
वित्तीय अनियमितताएं: कैम्पा (CAMPA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर रहते हुए व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप।
घोटाले: जैव विविधता संरक्षण, वन रक्षक भर्ती, और आरा मिल संचालन में संभावित घोटाले।
छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट 2024: इस कार्यक्रम के आयोजन में गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई गई है।
जांच में देरी पर सवाल
प्रतीक पाण्डेय ने वन मंत्री केदार कश्यप को लिखे एक स्मरण-पत्र में आरोप लगाया है कि आर्थिक अपराध शाखा (EOW/ACB) ने जांच शुरू करने के लिए शासन से अनुमति मांगी है, लेकिन अभी तक सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी है।
पत्र में तर्क दिया गया है कि:
- श्री वी. श्रीनिवास राव विभाग के सर्वोच्च अधिकारी हैं, अतः उनके अधीन काम करने वाले अधिकारी निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएंगे।
- अधिकारी का अपनी वरिष्ठ अधिकारी, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा के साथ भी विवाद और निर्देशों की अवहेलना की खबरें सार्वजनिक रही हैं।
- स्वतंत्र एजेंसी (EOW/ACB) से जांच न कराया जाना शासन की सुशासन (Good Governance) की छवि को धूमिल कर रहा है।


केंद्र सरकार का हस्तक्षेप
शिकायतकर्ता द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय मंत्रालय में की गई अपील के बाद, भारत सरकार के उप वन महानिरीक्षक अमित आनंद ने छत्तीसगढ़ के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मामले को राज्य वन विभाग को हस्तांतरित किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आवश्यक कार्यवाही कर आवेदक को सूचित किया जाए।
क्या है मांग?
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि “न्याय के तराजू के समक्ष सभी अधिकारी समान होने चाहिए” और लोक-धन के दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच हेतु तत्काल अनुमति प्रदान की जाए। इस पत्र की प्रतियां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन मंत्रियों को भी प्रेषित की गई हैं।



