कोरबा।समर्थन मूल्य पर चल रहा धान खरीदी अभियान शुक्रवार को समाप्त हो गया, लेकिन आकांक्षी जिला कोरबा लगातार दूसरे वर्ष भी अपने निर्धारित लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में जिले को 31.19 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य मिला था, जबकि वास्तविक खरीदी 27 लाख 38 हजार 120.40 क्विंटल पर ही सिमट गई। इस तरह जिला करीब 12.21 फीसदी लक्ष्य से पीछे रह गया।
1 नवंबर से 31 जनवरी तक चले इस अभियान के दौरान जिले की 41 सहकारी समितियों के अंतर्गत संचालित 65 उपार्जन केंद्रों में 43 हजार 566 किसानों ने समर्थन मूल्य पर 648 करोड़ 66 लाख रुपये से अधिक का धान बेचा। वहीं एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकृत कुल 52 हजार 556 किसानों में से 8 हजार 990 किसान, यानी 17.10 फीसदी, धान बेचने उपार्जन केंद्रों तक पहुंच ही नहीं सके।
पिछले साल से भी कमजोर प्रदर्शन
धान खरीदी के आंकड़े बीते वर्ष की तुलना में भी गिरावट दर्शाते हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में जिले में 29लाख 15 हजार 548.80 क्विंटल धान की खरीदी हुई थी, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा 1 लाख 77 हजार 428 क्विंटल कम रहा। किसानों की संख्या में भी 861 की कमी दर्ज की गई है।
भैसमा उपार्जन केंद्र फिर रहा अव्वल
धान खरीदी के मामले में भैसमा उपार्जन केंद्र लगातार दूसरे साल भी शीर्ष पर रहा, जहां 88 हजार 54.60 क्विंटल धान की खरीदी की गई।
उठाव व्यवस्था चरमराई, 300 करोड़ से अधिक का धान फंसा
31 जनवरी तक खरीदे गए धान में से केवल 14 लाख 13 हजार 970 क्विंटल (51.64%) का ही उठाव हो सका है। शेष 13 लाख 24 हजार 150.40 क्विंटल धान, जिसकी कीमत 304 करोड़ 55 लाख 45 हजार रुपये से अधिक है, जिले के 65 उपार्जन केंद्रों में जाम पड़ा हुआ है।
मार्कफेड द्वारा शत-प्रतिशत उठाव के लिए डीओ जारी किए जाने के बावजूद, प्रदेश के कुछ जिलों में राइस मिलरों की कथित अनियमितताओं और रिसाइक्लिंग मामलों के बाद बीते पखवाड़े से धान उठाव पर रोक लगी हुई है। ऑनलाइन गेट पास जारी नहीं होने के कारण उठाव की प्रक्रिया पूरी तरह ठप है।
धूप से सूख रहा धान, समितियों को नुकसान
लगातार तेज धूप के चलते उपार्जन केंद्रों में रखा धान सूख रहा है, जिससे वजन में कमी आ रही है। इसका सीधा आर्थिक नुकसान हर साल की तरह इस बार भी समितियों को उठाना पड़ रहा है। जिले में इस वर्ष धान उठाव व्यवस्था को सबसे कमजोर माना जा रहा है।
कई केंद्रों में हजारों क्विंटल धान फंसा
जिले के
- 24 उपार्जन केंद्रों में 20 हजार क्विंटल से अधिक,
- 12 केंद्रों में 30 हजार क्विंटल से अधिक,
- और 5 केंद्रों में 40 हजार क्विंटल से अधिक धान जाम है।
इनमें हाथी प्रभावित बरपाली (कोरबा), बरपाली (बरपाली ब्लॉक), भैसमा, कोरबी (पाली) और नवापारा प्रमुख हैं।
अधिकारी का बयान
कोरबा जिला मार्केटिंग अधिकारी रितुराज देवांगन ने बताया कि फिलहाल हेडक्वार्टर स्तर पर धान उठाव पर रोक लगी हुई है। शासन से जल्द दिशा-निर्देश मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी।







