छत्तीसगढ़ सरकार के शराब को प्लास्टिक बोतलों में बेचने के फैसले पर अब सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री और कृषि मंत्री रामविचार नेताम के हालिया बयान ने इस मुद्दे को और विवादास्पद बना दिया है।
रामविचार नेताम ने प्लास्टिक बोतल में शराब की बिक्री और उसके स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर कहा कि “प्लास्टिक बोतल वाली शराब से कैंसर होता है या नहीं, इसका उन्हें अनुभव नहीं है, अनुभव करके बताएंगे।” मंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने निर्णय लिया है कि राज्य में शराब की बिक्री प्लास्टिक बोतलों में की जाएगी। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि यदि खुद सरकार के मंत्री को प्लास्टिक बोतल से होने वाले संभावित स्वास्थ्य खतरों की स्पष्ट जानकारी नहीं है, तो क्या यह फैसला जनता के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ नहीं है?
विशेषज्ञ पहले से ही चेतावनी देते रहे हैं कि प्लास्टिक से निकलने वाले रसायन, खासकर अल्कोहल के संपर्क में आने पर, गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसके बावजूद सरकार का यह प्रयोग जनता को “ट्रायल” बनाने जैसा प्रतीत हो रहा है।
विवाद यहीं नहीं थमता। सरकार ने राज्य में 67 नई शराब दुकानों को खोलने की भी स्वीकृति दी है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या शराब की बोतल को कांच से प्लास्टिक में बदल देने से वह “अमृत” बन जाएगी?
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आलोचकों का कहना है कि शराब के बढ़ते चलन से प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं, स्वास्थ्य समस्याएं और सामाजिक संकट लगातार बढ़ रहे हैं। खासकर युवा वर्ग इस नीति से सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि क्या शराब दुकानों की संख्या बढ़ाकर सरकार युवाओं को शिक्षा और सवाल करने की प्रवृत्ति से दूर रखना चाहती है, ताकि जनहित के मुद्दों पर दबाव न बने।
अब सवाल साफ है—
कब तक छत्तीसगढ़ सरकार जनता के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ ऐसे प्रयोग करती रहेगी?



