छत्तीसगढ़ सरकार के जनसंपर्क विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। एक RTI कार्यकर्ता द्वारा प्राप्त दस्तावेज़ों के अनुसार विभाग में करीब 40 प्रतिशत कमीशन का खेल चल रहा है, जिसकी जद में सरकारी विज्ञापन वितरण की पूरी प्रक्रिया आ गई है।
हैरानी की बात यह है कि छत्तीसगढ़ में ज़मीनी स्तर पर महज़ 8 से 10 न्यूज़ चैनल ही प्रभावी रूप से दिखाई देते हैं, लेकिन RTI दस्तावेज़ बताते हैं कि जनसंपर्क विभाग हर महीने कुल 67 न्यूज़ और टीवी चैनलों को करोड़ों रुपये के विज्ञापन भुगतान कर रहा है।


RTI से प्राप्त जानकारी के मुताबिक अक्टूबर 2024 से दिसंबर 2024 के बीच सिर्फ़ तीन महीनों में इन 67 न्यूज़/टीवी चैनलों को 18 करोड़ 57 लाख रुपये का भुगतान किया गया। यह रकम सीधे तौर पर प्रदेश की जनता की गाढ़ी कमाई से खर्च की गई है।
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस सूची में झारखंड, कश्मीर, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा जैसे अन्य राज्यों के चैनल भी शामिल हैं, जो छत्तीसगढ़ में न तो दिखाई देते हैं और न ही उनकी कोई प्रभावी पहुंच है। इसके बावजूद इन्हें भारी भरकम विज्ञापन राशि दी जा रही है।
RTI दस्तावेज़ों में जिन मीडिया संस्थानों के नाम सामने आए हैं, उनमें ओमेगा ब्रॉडकास्ट, ओमेगा टीवी, संगीत ऑडियो, सौभाग्य मीडिया, सोफिया एंटरटेनमेंट, शार्प ऑय, ख़ुशी एडवर्टिज़मेंट, केडीएम बिज़नेस और जयपुर मीडिया जैसे कई ऐसे नाम शामिल हैं, जिनके बारे में आम दर्शक ने शायद कभी सुना भी नहीं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन तथाकथित चैनलों के ज़रिये 40% कमीशन का खेल खेला जा रहा है? क्या विज्ञापन वितरण पारदर्शी है या सुनियोजित लूट?
RTI के इन खुलासों ने जनसंपर्क विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ़ अनियमितता नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।






