रायपुर ने रचा इतिहास, अपार्टमेंट में वर्चुअल नेट मीटरिंग लागू करने वाला देश का पहला शहर बना

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देशभर में मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत रायपुर की पार्थिवी पैसिफिक सोसायटी में वर्चुअल नेट मीटरिंग (VNM) सुविधा की शुरुआत के साथ ही रायपुर यह नवाचार अपनाने वाला देश का पहला शहर बन गया है। इस पहल से अपार्टमेंट में रहने वाले परिवारों को बिजली बिल में सीधी और बड़ी राहत मिलने लगी है।

पार्थिवी पैसिफिक सोसायटी में कुल 60 किलोवाट क्षमता का सामूहिक सोलर प्लांट स्थापित किया गया है, जिससे सोसायटी के 20 फ्लैटों को सौर ऊर्जा का लाभ मिल रहा है। वर्चुअल नेट मीटरिंग की यह व्यवस्था उन लोगों के लिए वरदान साबित हुई है, जो बहुमंजिला इमारतों में रहते हैं और जिनके पास व्यक्तिगत रूप से सोलर पैनल लगाने की सुविधा नहीं होती।

इस मॉडल के तहत एक ही सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजी जाती है और फिर तय हिस्सेदारी के आधार पर प्रत्येक फ्लैट के बिजली बिल में यूनिट का क्रेडिट जोड़ा जाता है। इससे सभी परिवार बिना अलग-अलग छतों पर पैनल लगाए सौर ऊर्जा का उपयोग कर पा रहे हैं।

यह परियोजना कैपेक्स मॉडल पर विकसित की गई है, जिसमें सभी 20 परिवारों ने मिलकर निवेश किया। पूरे प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 24 लाख रुपये रही। प्रति परिवार करीब 1.20 लाख रुपये का खर्च आया, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 30 हजार रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी भी दी जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं का आर्थिक भार काफी कम हो गया है।

सोलर सिस्टम शुरू होते ही बिजली बिलों में असर दिखने लगा है। अनुमान है कि इस व्यवस्था से सालाना करीब 6.30 लाख रुपये की कुल बचत होगी। यानी हर परिवार को लगभग 31,500 रुपये प्रति वर्ष की राहत मिलेगी। फिलहाल प्रत्येक परिवार को औसतन 300 यूनिट तक बिजली का क्रेडिट मिल रहा है, जिससे मासिक खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पहल को राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने की दिशा में नई राह खोलेगा।

ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव के मुताबिक, वर्चुअल नेट मीटरिंग शहरी क्षेत्रों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। इससे सामूहिक सोलर परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा, बिजली बिल घटेंगे और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। पार्थिवी पैसिफिक सोसायटी की सफलता के बाद अब इस मॉडल को प्रदेश के अन्य शहरों में भी लागू करने की तैयारी की जा रही है।

 क्या है वर्चुअल नेट मीटरिंग?

वर्चुअल नेट मीटरिंग में एक केंद्रीय सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली को ग्रिड में भेजा जाता है। इसके बाद अपार्टमेंट के सभी उपभोक्ताओं को उनकी हिस्सेदारी के अनुसार यूनिट का लाभ उनके व्यक्तिगत बिजली बिल में दिया जाता है। इससे अपार्टमेंट संस्कृति में सौर ऊर्जा को अपनाना आसान हो जाता है।

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