H-1B वीजा महंगा: प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस में बढ़ोतरी, भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर पड़ेगा सीधा असर

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

वाशिंगटन। अमेरिका में काम और पढ़ाई का सपना देख रहे भारतीयों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) ने H-1B वीजा सहित कई आव्रजन श्रेणियों की प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस बढ़ाने का ऐलान किया है। नई दरें 1 मार्च से लागू होंगी।

यूएससीआइएस के अनुसार, यह फीस वृद्धि जून 2023 से जून 2025 तक की महंगाई दर को ध्यान में रखते हुए की गई है। इस बदलाव का असर रोजगार-आधारित और गैर-आप्रवासी आवेदनों पर पड़ेगा, जिनका लाभ बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर, छात्र और नियोक्ता उठाते हैं।

 नई फीस क्या होगी?

संशोधित शुल्क ढांचे के तहत—

  • H-2B और R-1 वीजा के लिए फॉर्म I-129 की प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस
    1,685 डॉलर से बढ़कर 1,780 डॉलर
  • H-1B, L-1, O-1, P-1 और TN वीजा (I-129 के अन्य वर्ग)
    2,805 डॉलर से बढ़कर 2,965 डॉलर
  • रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड (फॉर्म I-140)
    फीस बढ़कर 2,965 डॉलर हो गई है
  • स्टेटस बदलने या बढ़ाने के आवेदन (फॉर्म I-539)
    (F-1/F-2 छात्र, J-1/J-2 एक्सचेंज विज़िटर, M-1/M-2 छात्र)
    1,965 डॉलर से बढ़कर 2,075 डॉलर
  • वर्क परमिट और OPT/ STEM-OPT (फॉर्म I-765)
    फीस 1,685 डॉलर से बढ़कर 1,780 डॉलर

 भारतीयों पर क्यों पड़ेगा ज्यादा असर?

अमेरिका के रोजगार-आधारित वीजा सिस्टम, खासकर H-1B प्रोग्राम में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। इसके अलावा, ग्रीन कार्ड के लंबित मामलों में भी भारतीय आवेदकों की संख्या काफी ज्यादा है।

अमेरिकी विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले भारतीय छात्र OPT और STEM-OPT के जरिए अमेरिका में काम का अनुभव हासिल करते हैं और बाद में H-1B वीजा के लिए आवेदन करते हैं। ऐसे में प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस बढ़ने से छात्रों और नियोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

 USCIS ने क्या कहा?

यूएससीआइएस ने स्पष्ट किया है कि बढ़ी हुई फीस से मिलने वाला राजस्व—

  • प्रीमियम प्रोसेसिंग सेवाओं को बेहतर बनाने
  • मामलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज करने
  • बैकलॉग कम करने
  • और आव्रजन व नागरिकता सेवाओं को मजबूत करने
    के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment