जयशंकर की ढाका यात्रा पर बांग्लादेश का बड़ा बयान, क्या भारत-बांग्लादेश संबंधों में आएगी नरमी?

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर हाल ही में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने ढाका पहुंचे। इस यात्रा को लेकर अब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने साफ किया है कि इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा क्या होगी, इसका फैसला भविष्य करेगा।

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी देखने को मिल रही है।

यात्रा पूरी तरह औपचारिक थी: बांग्लादेश

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा कि जयशंकर की यात्रा बेहद संक्षिप्त थी।

उन्होंने बताया,

“वे पूरे कार्यक्रम में मौजूद रहे और फिर लौट गए। यह एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसमें ज्यादा अर्थ निकालने की जरूरत नहीं है।”

तौहीद हुसैन ने यह भी स्पष्ट किया कि इस दौरान किसी तरह की राजनीतिक बातचीत नहीं हुई, क्योंकि दौरा पूरी तरह औपचारिक था।

क्या रिश्तों में सुधार होगा?

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, जब उनसे पूछा गया कि क्या इस दौरे से दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता है, तो उन्होंने कहा,

“इस सवाल का जवाब भविष्य ही देगा।”

तारिक रहमान को सौंपा पीएम मोदी का संदेश

जयशंकर ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता तारिक रहमान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शोक संदेश पत्र सौंपा। तारिक रहमान, खालिदा जिया के बड़े पुत्र हैं और 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों में प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

मुलाकात के दौरान जयशंकर ने भरोसा जताया कि खालिदा जिया के विचार और मूल्य भारत-बांग्लादेश साझेदारी को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शक साबित होंगे।

विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा,

“मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पत्र सौंपा और भारत सरकार व जनता की ओर से गहरी संवेदना व्यक्त की।”

पाकिस्तानी स्पीकर से भी हुई मुलाकात

इस बीच पाकिस्तान ने भी पुष्टि की है कि ढाका में जयशंकर और पाकिस्तानी नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई।

यह मुलाकात खालिदा जिया के अंतिम संस्कार के दौरान हुई, जहां दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया।

खास बात यह है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद यह पहली बार है जब भारत और पाकिस्तान के वरिष्ठ नेताओं के बीच किसी तरह का प्रत्यक्ष संपर्क देखा गया।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment