सार
दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर चीन की दखलअंदाजी पर भारत ने सख्त रुख अपनाया है। अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चीन को दो टूक कहा है कि इस विषय में निर्णय का अधिकार केवल दलाई लामा और उनसे जुड़ी पारंपरिक संस्थाओं को है।
विस्तार
चीन की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी तय करने के लिए बीजिंग की मंजूरी जरूरी होगी। इस पर भारत ने प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कर दिया कि तिब्बती धार्मिक परंपरा में हस्तक्षेप किसी भी रूप में स्वीकार नहीं होगा।
गुरुवार को किरेन रिजिजू ने बयान देते हुए कहा कि दलाई लामा बौद्ध समुदाय के सबसे बड़े और आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं। उनके उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से स्थापित परंपराओं और खुद दलाई लामा की इच्छा के अनुसार होगी। उन्होंने कहा कि गादेन फोडरंग ट्रस्ट को ही उनके अगले उत्तराधिकारी की पहचान करने और उसे मान्यता देने का अधिकार है।
भारत सरकार की ओर से दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस (6 जुलाई) के अवसर पर धर्मशाला में एक बड़ा समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और राजीव रंजन सिंह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
दलाई लामा न सिर्फ तिब्बती बौद्धों बल्कि पूरी दुनिया में नालंदा बौद्ध परंपरा को मानने वालों के लिए एक अहम आध्यात्मिक संस्था हैं।



