अमेरिका इस समय गंभीर प्रशासनिक संकट का सामना कर रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच बजट पर सहमति नहीं बनने के कारण देश में “शटडाउन” का खतरा मंडरा रहा है। यदि शनिवार की आधी रात तक बजट पर कोई समझौता नहीं हो पाया, तो अमेरिका का सरकारी कामकाज ठप हो जाएगा।
शटडाउन की स्थिति में लगभग 9 लाख सरकारी कर्मचारियों को जबरन छुट्टी पर भेजा जा सकता है। वहीं, कुछ जरूरी विभागों के कर्मचारी बिना वेतन के काम करने को मजबूर होंगे। इसका असर न केवल प्रशासनिक कामकाज पर पड़ेगा, बल्कि आम नागरिकों की सेवाओं, सरकारी योजनाओं और आर्थिक गतिविधियों पर भी गहराई से महसूस किया जाएगा।
अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच खर्च और नीतियों को लेकर गंभीर मतभेद हैं। विपक्षी सांसद खर्च में कटौती और कुछ नीतिगत बदलाव की मांग कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार इसे देश के विकास और जरूरतों के लिए आवश्यक बता रही है।
अगर यह गतिरोध बना रहा तो रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक सुरक्षा जैसे कई विभागों में कामकाज प्रभावित होगा। पिछली बार 2018-19 में भी ऐसा ही शटडाउन 35 दिनों तक चला था, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ था।
राष्ट्रपति बाइडेन ने कांग्रेस से अपील की है कि देशहित में सहमति बनाकर बजट को पारित किया जाए, ताकि प्रशासनिक गतिविधियां बाधित न हों। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आखिरी क्षणों में कोई समझौता हो पाएगा या अमेरिका फिर से शटडाउन के दौर में प्रवेश करेगा।



