छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार और कई सरकारी योजनाओं के बावजूद स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की समस्या अभी भी बनी हुई है। खासकर कक्षा 5 से 8 और फिर 8 से 10 के बीच काफी बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं। यूडीआईएसई (Unified District Information System for Education) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक जैसे-जैसे कक्षा बढ़ती है, वैसे-वैसे ड्रॉपआउट की दर भी बढ़ जाती है। इस स्थिति को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने ड्रॉपआउट खत्म करने के लिए नई योजना बनाने और इसे शून्य तक लाने का लक्ष्य तय किया है।
मुख्य सचिव ने भी जताई चिंता
हाल ही में मुख्य सचिव विकासशील ने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिन जिलों में ड्रॉपआउट ज्यादा है, वहां इसे कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और धीरे-धीरे इसे शून्य तक लाया जाए।
छत्तीसगढ़ में ड्रॉपआउट की स्थिति
- कक्षा 1 से 5 (प्राथमिक) में लगभग 1 से 2 प्रतिशत बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं।
- कक्षा 1 से 8 (एलीमेंट्री) में यह आंकड़ा 4 से 5 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।
- कक्षा 9 से 10 (माध्यमिक) में ड्रॉपआउट सबसे ज्यादा, करीब 18 से 22 प्रतिशत तक है।
सबसे बड़ी समस्या कक्षा 8 के बाद बच्चों को स्कूल में बनाए रखना है। इसके पीछे कई कारण हैं जैसे आर्थिक तंगी, दूर-दराज के स्कूल, पारिवारिक जिम्मेदारियां, बाल विवाह और बच्चों से काम करवाना।
इन जिलों में स्थिति ज्यादा गंभीर
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार आदिवासी और दूरस्थ इलाकों में ड्रॉपआउट की समस्या ज्यादा है। बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव और बलरामपुर जैसे जिलों में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट राज्य के औसत से काफी अधिक है। इसकी वजह वहां की भौगोलिक स्थिति, कमजोर परिवहन व्यवस्था और सामाजिक-आर्थिक हालात बताए जा रहे हैं।
राज्य में 55 लाख से ज्यादा छात्र
छत्तीसगढ़ में फिलहाल 55 लाख से अधिक बच्चे स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या सरकारी स्कूलों की है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कक्षा 8 से 10 के बीच बच्चों को स्कूल से जुड़ा नहीं रखा गया तो आगे बोर्ड परीक्षाओं में दाखिले और परिणाम दोनों पर असर पड़ सकता है। खासकर बस्तर और सरगुजा संभाग में इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है।







