रायपुर।रायपुर में टाटा पावर को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। कंपनी ने रायपुर जिले की चार तहसीलों—रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर—में बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किया है।
हैरानी की बात यह है कि कर्नाटक में इसी तरह के प्रस्ताव का जमकर विरोध हुआ था। वहां करीब 20 लाख आपत्तियां सामने आई थीं। वहीं छत्तीसगढ़ में अब तक आयोग और टाटा पावर के पास 100 आपत्तियां भी नहीं पहुंची हैं।
कर्नाटक में कर्मचारी से लेकर किसान तक विरोध में उतरे
कर्नाटक में बिजली कर्मचारी संगठनों, इंजीनियरों, किसानों, उपभोक्ता संगठनों और राजनीतिक दलों ने टाटा पावर के प्रस्ताव का विरोध किया था। विरोध इतना बढ़ा कि राज्य सरकार को भी इसके खिलाफ सामने आना पड़ा। इसके बाद टाटा पावर ने 3 जुलाई 2026 को 19 जिलों के लिए दिया गया अपना आवेदन वापस ले लिया था।
छत्तीसगढ़ में कर्मचारी संगठनों ने जताई आपत्ति
छत्तीसगढ़ में फिलहाल बिजली कर्मचारी और इंजीनियर संगठनों की ओर से आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। संगठनों का कहना है कि अगर निजी कंपनी सिर्फ ज्यादा कमाई वाले और आकर्षक क्षेत्रों में बिजली वितरण शुरू करती है, तो इसका असर सरकारी बिजली वितरण कंपनी CSPDCL की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।
साथ ही सरकारी बिजली व्यवस्था में चल रही क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
21 सितंबर तक दर्ज करा सकते हैं आपत्ति
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने आम उपभोक्ताओं, संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से टाटा पावर के आवेदन पर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तारीख 21 सितंबर 2026 है। इसके बाद 1 अक्टूबर को सुबह 11:30 बजे इस मामले में सार्वजनिक जनसुनवाई आयोजित की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कर्नाटक में जिस मुद्दे पर करीब 20 लाख लोगों ने आपत्ति जताई, उसी मुद्दे पर छत्तीसगढ़ में आम उपभोक्ताओं की भागीदारी इतनी कम क्यों है?






