ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी बनी अमेरिका के लिए मुसीबत, भारत-चीन की नजदीकियों से बढ़ी वॉशिंगटन की टेंशन

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति का असर उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। टैरिफ को लेकर भारत, चीन और रूस अब एकजुट होते दिख रहे हैं। वहीं, गलवान घाटी घटना के बाद ठंडे पड़े भारत-चीन रिश्तों में भी धीरे-धीरे गर्माहट लौट रही है। खबर है कि दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान सेवाएं जल्द फिर से शुरू हो सकती हैं।

भारत सरकार ने एयर इंडिया और इंडिगो जैसी प्रमुख एयरलाइनों को चीन के लिए उड़ानें शुरू करने की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। कोरोना काल के बाद से यह सेवाएं बंद थीं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले की आधिकारिक घोषणा अगस्त के अंत में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है।

बीजिंग स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर चाइना एंड ग्लोबलाइजेशन के अध्यक्ष हेनरी वांग के अनुसार, ट्रंप के टैरिफ फैसले ने भारत को यह महसूस कराया है कि रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना जरूरी है। यही कारण है कि भारत अब अपने पड़ोसियों के साथ आर्थिक रिश्तों को सुधारने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

अमेरिका में भी बढ़ी आलोचना
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भी ट्रंप की नीति की आलोचना करते हुए कहा कि रूस को नुकसान पहुंचाने के इरादे से उठाए गए टैरिफ कदम का उल्टा असर हो सकता है, क्योंकि इससे भारत और चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूत हो रहे हैं।

पांच साल बाद रिश्तों में बदलाव
साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव चरम पर था। लेकिन अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक संवाद में तेजी आई है, जो वॉशिंगटन के लिए चिंता का विषय बन गया है।

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