भोपाल।मध्यप्रदेश सरकार ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कोनोकार्पस (Conocarpus erectus) और सप्तपर्णी (Alstonia scholaris) वृक्षों के रोपण पर प्रतिबंध लगा दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी नगर निगम आयुक्तों और नगर पालिका अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
यह फैसला भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। समिति ने 21 अगस्त 2025 को प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में कोनोकार्पस वृक्ष से उत्पन्न पर्यावरणीय और पारिस्थितिक खतरों पर गंभीर चिंता जताई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, कोनोकार्पस वृक्ष को देश के कई शहरों में सड़क किनारे और हरित क्षेत्रों में तेजी से लगाया गया, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों में यह वृक्ष आक्रामक प्रकृति का पाया गया है। इसके अनियंत्रित विस्तार से स्थानीय जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है, भू-जल स्तर पर दबाव बढ़ रहा है और इसके पराग से एलर्जी जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आ रही हैं।

CEC ने यह भी उल्लेख किया है कि गुजरात और तमिलनाडु पहले ही इस वृक्ष प्रजाति पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। इसके अलावा कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और असम राज्यों ने भी कोनोकार्पस को हटाकर देशज वृक्ष प्रजातियों को लगाने के निर्देश जारी किए हैं।
वहीं, सप्तपर्णी वृक्ष से निकलने वाला पराग भी अस्थमा, सर्दी-खांसी और सांस से जुड़ी बीमारियों को बढ़ावा देने वाला बताया गया है, जिसके चलते इसे भी प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है।
अपर आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास कैलाश वानखेड़े द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब प्रदेश के किसी भी नगरीय निकाय द्वारा इन दोनों वृक्षों का रोपण नहीं किया जाएगा। साथ ही, जहां पहले से कोनोकार्पस लगाए गए हैं, वहां नियमानुसार उन्हें हटाकर स्थानीय और पर्यावरण के अनुकूल वृक्षों से प्रतिस्थापित किया जाएगा।
इस आदेश की प्रतिलिपि सभी जिला कलेक्टरों को भी सूचनार्थ भेजी गई है।



