रायपुर। छत्तीसगढ़ में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की लगातार ट्रैप कार्रवाई के बाद यह साफ हो गया है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार राजस्व विभाग में सामने आया है। पटवारी, राजस्व निरीक्षक और विभागीय कर्मचारियों की लगातार गिरफ्तारी ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इससे राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा की सार्वजनिक छवि भी प्रभावित हुई है।
बढ़ते दबाव और बिगड़ती छवि के बीच सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंत्री के निज सहायक को हटाने का फैसला लिया है। इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख़्त कदम बताने की कोशिश की जा रही है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को ‘बलि का बकरा’ बनाए जाने के रूप में देखा जा रहा है।
जारी आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम, 2012 की कंडिका 4(5) एवं 5(4) के तहत को-टर्मिनस आधार पर कार्यरत दुर्गेश धारे, पिता स्वर्गीय तुकाराम धारे की संविदा नियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।

धारे, मंत्री टंक राम वर्मा (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास एवं उच्च शिक्षा) की निजी स्थापना में निज सहायक (संविदा) के पद पर पदस्थ थे।
राज्य में जिस तरह से पटवारियों और राजस्व अमले पर सबसे ज्यादा ट्रैप केस दर्ज हुए हैं, उससे यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या केवल एक संविदा कर्मचारी को हटाने से राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लग पाएगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नीतिगत सुधार, निगरानी तंत्र और जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक ऐसी कार्रवाइयां सिर्फ छवि सुधार तक सीमित रह जाएंगी।
निज सहायक की सेवा समाप्ति को सरकार का सख़्त संदेश बताया जा रहा है, लेकिन असल परीक्षा अब यह होगी कि क्या बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?, क्या राजस्व विभाग की कार्यसंस्कृति बदलेगी? या फिर भ्रष्टाचार पहले की तरह जारी रहेगा?
फिलहाल, यह मामला राजनीतिक जवाबदेही और प्रशासनिक ईमानदारी की असली परीक्षा बन चुका है।






