रायपुर। देश में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के साथ हो रहे शोषण, कम वेतन और खराब कामकाजी हालात के खिलाफ मंगलवार को देशभर में ‘राष्ट्रीय मांग दिवस’ मनाया गया। यह कार्यक्रम केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कई स्वतंत्र श्रमिक संगठनों के आह्वान पर हुआ। इसी क्रम में रायपुर में भी अंबेडकर चौक पर बड़ी संख्या में श्रमिक और कर्मचारी एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मानेसर, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों पर हो रहे कथित अत्याचार, कम मजदूरी और असुरक्षित कार्य स्थितियों पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि कई जगह ठेका श्रमिकों से रोज 10 से 13 घंटे तक काम लिया जा रहा है, जबकि उन्हें सिर्फ 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन मिल रहा है। साथ ही उन्हें पीएफ, ईएसआई, ओवरटाइम और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।
सभा को संबोधित करते हुए ट्रेड यूनियन नेता धर्मराज महापात्र ने कहा कि मजदूर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को सुनने के बजाय उन पर कार्रवाई कर रही है और झूठे केस दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और एलपीजी जैसी जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से श्रमिकों की हालत और खराब हो गई है।
प्रदर्शन में मांग रखी गई कि न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 26 हजार रुपये प्रति माह की जाए, काम का समय 8 घंटे तय हो, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान मिले, ठेका प्रथा खत्म हो और समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। साथ ही श्रम कानूनों में बदलाव को वापस लेने की भी मांग की गई।
मजदूर संगठनों ने यह भी मांग की कि गिरफ्तार किए गए श्रमिकों और कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए और उनके खिलाफ दर्ज केस वापस लिए जाएं। इसके अलावा ट्रेड यूनियनों के साथ वार्ता करने और श्रमिक सम्मेलन जल्द बुलाने की भी बात कही गई।
सभा में कई संगठनों जैसे इंटक, एटक, सीटू, एचएमएस और अन्य कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। अंत में एक प्रस्ताव पास कर NEET परीक्षा रद्द होने से प्रभावित छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया गया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई।



