छत्तीसगढ़ के दक्षिणी भाग में आने वाले तीन दिनों में ध्यान देने वाली मौसमीय स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि चक्रवात मोन्था के प्रभाव से पांच जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें विशेष रूप से बस्तर डिवीजन प्रमुख रूप से प्रभावित होने वाला है।
इस दौरान बस्तर में हवाओं की गति लगभग 80 किमी/घंटा तक पहुँच सकती है, जिससे पेड़-पौधे, छोटी-मोटी संरचनाएँ और बिजली-बिलंबित लाइनें खतरे में आ सकती हैं। इसी तरह, राज्य के मध्य एवं उत्तरी हिस्सों में–जैसे रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग–में भी कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई जा रही है, जिससे जलजमाव या दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।
प्रशासन ने स्थानीय-स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी है: प्रभावित जिलों में आपदा प्रतिक्रिया-टीम्स, स्वास्थ्य-सुविधाएं, फेलोड़ व्यवस्थाएं एवं जरूरी निगरानी तंत्र सक्रिय हैं। आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे घरों के आसपास इंजन, पेड़, अस्थायी शेड आदि को सुरक्षित करें, अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और जल्दी से अपडेट प्राप्त करते रहें।
विनाशकारी परिस्थितियों से निपटने के लिए यह तीन-दिन का अति महत्वपूर्ण समय है। यदि हवा की गति बढ़े, बारिश ज़्यादा हो जाए, या बाढ-स्थिति बन जाए — तो स्थानीय बचाव-मंत्रियों और प्रशासन के निर्देशों का त्वरित पालन करना अति आवश्यक होगा।
इन स्थितियों में यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि लोगों को मोबाइल फोन चार्ज रखें, इमरजेंसी संपर्क साझा करें, बच्चों एवं बुज़ुर्गों को सुरक्षित स्थान पर रखें और यदि जरूरत पड़े तो निकासी-स्थल की जानकारी रखें।
इस प्रकार, आगामी 72 घंटों में छत्तीसगढ़ के इन इलाकों में मौसम-सक्रियता बढ़ती हुई देखने को मिल सकती है, जिसे ध्यानपूर्वक मॉनिटर करना आवश्यक है ताकि नुकसान-घाट कम से कम हो सके।







