रायपुर।छत्तीसगढ़ अपनी कृषि उपज, वन बायोमास और जैविक कचरे का उपयोग हरित ऊर्जा के साथ ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए तेजी से कर रहा है। इसी दिशा में नया रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र (CGSCCC), सेंटर फॉर एनवायरमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (CEED) और छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) के संयुक्त तत्वावधान में राज्य स्तरीय बैठक और चर्चा आयोजित की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य की स्थानीय क्षमताओं को राष्ट्रीय ऊर्जा जरूरतों से जोड़ना, हरित निवेश को बढ़ावा देना, ग्रामीण लोगों के लिए रोजगार और आय के अवसर बढ़ाना तथा औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में रोडमैप तैयार करना रहा।
राज्य सरकार ‘छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CG-CBG) नीति 2026’ और ‘औद्योगिक विकास नीति 2024-30’ के जरिए बायोएनर्जी परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है। सरकार का लक्ष्य फसल अवशेष, पशुओं के गोबर और शहरी जैविक कचरे का बेहतर इस्तेमाल कर हर साल 5 लाख टन कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ना है।

बायोमास को आर्थिक संसाधन के रूप में देखने पर जोर
बैठक में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत और विशेषज्ञों ने बायोएनर्जी से जुड़े विषयों पर चर्चा की। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सीसीएफ आलोक तिवारी (IFS) और छत्तीसगढ़ स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड के सदस्य-सचिव अमिताभ वाजपेयी (IFS) ने बैठक की अध्यक्षता की।
इस दौरान CEED के सीईओ रमापति कुमार, BPCL के संतोष वार्ष्णेय, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चंद्रमौली सिंह, जिंदल पावर लिमिटेड के विशाल जाधव, एनर्जी कोर इंडिया के विशाल प्रसाद गुप्ता सहित उद्योग और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने बायोएनर्जी पर अपने विचार और संस्थागत पहलों की जानकारी साझा की।

CBDA के सीईओ सुमित सरकार ने कहा कि बायोमास को केवल कृषि अवशेष के तौर पर नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे आर्थिक विकास को गति देने वाले महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
CCF आलोक तिवारी ने कहा कि बायोमास संग्रहण के लिए क्लस्टर आधारित व्यवस्था अपनाने से परिवहन और लॉजिस्टिक लागत कम होगी और किसानों को भी बेहतर आर्थिक लाभ मिल सकेगा।
FPO, सहकारी समितियों और SHG की होगी अहम भूमिका
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी समितियां और स्व-सहायता समूह (SHG) बायोमास की सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। इसके लिए बड़े स्तर पर भंडारण व्यवस्था विकसित करने और पूरे साल बायोमास की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में कृषि, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, उद्योग और वित्त विभागों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए बायोएनर्जी योजनाओं को जमीन पर उतारने पर जोर दिया गया। अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार के अवसर पैदा करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
राज्य सरकार की इन पहलों के जरिए छत्तीसगढ़ को बायो-रिसोर्स आधारित अर्थव्यवस्था में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है।






