कोरबा से एक दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां एक औद्योगिक लापरवाही ने एक मजदूर की जिंदगी छीन ली। एचटीपीपी के ग्राम झाबू स्थित राखड़ डेम अचानक टूट गया, और वहां काम कर रहा एक JCB ऑपरेटर देखते ही देखते राख के मलबे में जिंदा दफन हो गया।
मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक सब कुछ सामान्य चल रहा था, तभी अचानक डेम के एक हिस्से में दबाव बढ़ा और पल भर में राख का तेज बहाव शुरू हो गया। ऑपरेटर को संभलने तक का मौका नहीं मिला और उसकी मशीन सहित वह राख के दलदल में समा गया।
इस हादसे ने वहां काम कर रहे मजदूरों को हिलाकर रख दिया। चीख-पुकार और अफरा-तफरी के बीच साथी कर्मचारियों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन राख का भारी दबाव हर कोशिश पर भारी पड़ गया।
घटना के तुरंत बाद प्रबंधन और सुरक्षा टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। प्रशासन को सूचना देकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया, मगर यह कोशिश एक जिंदगी को वापस नहीं ला सकी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि राखड़ डेम की हालत पहले से ही खराब थी और सुरक्षा को लेकर कई बार सवाल उठाए जा चुके थे। आरोप है कि चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया, जिसका नतीजा आज एक परिवार के उजड़ने के रूप में सामने आया।
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही की कहानी बयां करता है। सवाल यह है कि आखिर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार लोग कब जागेंगे? और कब तक ऐसे हादसे आम लोगों की जान लेते रहेंगे?
इस घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश और भय का माहौल है, वहीं औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है।







