दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में इस दिवाली के अवसर पर एक डरावना हादसा सामने आया है। जहाँ खुशी का त्योहार गाँव-शहर में पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा था, वहाँ पटाखा जलाते समय सावधानी न बरतने के कारण 21 लोग घायल हो गए। इस घटना में जो लोग घायल हुए हैं, उन्हें हाथ-पैर तथा आँखों में बेहद तकलीफ है और उनका इलाज जारी है।
घायल लोगों ने बताया कि पटाखा जलाते समय वे या आसपास के लोग बहुत करीब खड़े थे। अचानक पटाखे का विस्फोट हुआ, जिससे आग की लपटें पैर और हाथ तक पहुंच गयीं तथा कई को आँखों में चोटें आईं। अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि इस तरह की चोटें बहुत गंभीर हो सकती हैं और रोग-प्रतिक्रिया व संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
मेडिकल टीम ने यह भी बताया कि पटाखा जलाते समय लोगों को कम-से-कम एक सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और आँखों को बंद अथवा विशेष सुरक्षा चश्मा पहनना चाहिए। इसके अलावा, बच्चों और बुजुर्गों को पटाखा जलाने से दूर रखना चाहिए, क्योंकि उनकी प्रतिक्रिया क्षमता व त्वचा नाजुक होती है। इस दुर्घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि त्योहारों में आनंद के साथ-साथ सुरक्षा को प्राथमिकता देना परम आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि ऐसी घटनाएं हर वर्ष देखने को मिलती हैं—स्वागत के इस मौके पर उत्साह में लोग नियम-निर्देश भूल जाते हैं, जिससे अप्रत्याशित दुर्घटनाएं हो जाती हैं। इसीलिए योग्यता-प्राप्त पटाखों का चयन, सुरक्षित स्थान पर उपयोग तथा तुरंत बिकने या जलने के बाद जगह को सुरक्षित करना बेहद ज़रूरी है।
समापन में कहा जा सकता है कि दिवाली हमें रोशनी और खुशियाँ देती है, लेकिन रोशनी के साथ सुरक्षा की रोशनी भी जलनी चाहिए। इस घटना को हमें एक सबक के रूप में लेना चाहिए — क्योंकि एक सुरक्षित दिवाली ही सच्ची दिवाली है।







