कोरबा जिले में एक बार फिर हाथियों का आतंक गहरा गया है। बुधवार देर शाम बालको क्षेत्र के पास देखा गया विशाल झुंड अचानक ग्राम दोंदरो पहुंच गया, जिसके बाद पूरा गांव डर और अफरा-तफरी में डूब गया। खेतों में खड़ी धान की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है—अब तक 17 से अधिक किसानों की फसल रौंदी जा चुकी है।
अभी धान कटाई का समय है, लेकिन हाथियों के लगातार गांव की ओर बढ़ने की खबर से ग्रामीण खेतों तक जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। किसान दोहरी मुश्किल में फंसे हैं—धान काटने जाएं तो जान का खतरा, न जाएं तो हाथी फसल बर्बाद कर रहे हैं।
रात में ग्रामीण रतजगा करने को मजबूर हैं, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर लगातार करीबी नजर बनाए हुए है। हाथी दिखने की सूचना मिलते ही गांव में मुनादी कराई जा रही है, ताकि कोई भी व्यक्ति झुंड के पास न पहुंचे। विभाग की टीम रातभर रेस्क्यू अभियान चलाकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिश में लगी है।
कोरबा वन मंडल में इस समय लगभग 52 हाथी अलग-अलग क्षेत्रों में घूम रहे हैं।
केवल करतला रेंज में ही छह अलग-अलग झुंड सक्रिय हैं—
- बेहरचुंआ में 11 हाथी
- केराकछार में 3 हाथी
- दूसरे झुंड में 6 हाथी
- नोनबिर्रा में 17 हाथियों का बड़ा दल
- नवापारा और कोटमेर में अलग हुए एक-एक दंतैल
- कोरबा रेंज के गेंराव में भी एक दंतैल हाथी सक्रिय
लगातार बढ़ती हाथियों की आवाजाही से ग्रामीण चैन की सांस नहीं ले पा रहे हैं और हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।



