बिहार चुनाव में सहनी की प्रेशर पॉलिटिक्स काम आई? राहुल गांधी की मीटिंग से बदला सियासी समीकरण

Madhya Bharat Desk
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पटना:बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे की राजनीति अपने चरम पर है। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने गुरुवार को अपने “प्रेशर पॉलिटिक्स” से गठबंधन के बड़े नेताओं को मुश्किल में डाल दिया।

सहनी की पार्टी ने पहले दोपहर 1 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, फिर समय को 4 बजे और बाद में 6 बजे तक टाल दिया। अंत में प्रेस वार्ता रद्द कर दी गई, यह कहते हुए कि “राहुल गांधी फिलहाल बातचीत कर रहे हैं।” इस पूरे घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी।

सीट बंटवारे पर अब होगी निर्णायक बातचीत

महागठबंधन के भीतर अब उम्मीद है कि किसी भी समय सीट बंटवारे पर अंतिम सहमति बन जाएगी। बताया जा रहा है कि VIP ने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए यह रणनीति अपनाई। इस कदम से कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) दोनों पर दबाव बना।

राजद ने सहनी को अपने कोटे से 10 सीटें देने का प्रस्ताव रखा है, जबकि चार सीटों पर राजद नेता VIP के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन मामला कांग्रेस में जाकर अटक गया है। कांग्रेस को कहा गया है कि वह अपने हिस्से से आठ सीटें छोड़े, जिस पर फिलहाल बातचीत जारी है।

लोकसभा में तेजस्वी के साए में, विधानसभा में राहुल के फेर में फंसे सहनी

लोकसभा चुनाव में मुकेश सहनी को इतनी परेशानी नहीं हुई थी क्योंकि उस समय तेजस्वी यादव की नेतृत्व क्षमता पर गठबंधन भरोसा कर रहा था। लेकिन अब बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का बढ़ता प्रभाव सहनी के लिए चुनौती बन गया है।
17 अक्टूबर तक नामांकन की आखिरी तारीख है, और सहनी अब तक किसी सीट पर स्पष्ट स्थिति में नहीं हैं। इसलिए उन्होंने “प्रेस कांफ्रेंस की राजनीति” से अपने लिए जगह बनाने का अंतिम दांव चला।

VIP को दोहराना पड़ सकता है NDA वाला फॉर्मूला

2020 के विधानसभा चुनाव में मुकेश सहनी की पार्टी NDA का हिस्सा थी। उस समय 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारे गए थे, जिनमें से केवल चार ही जीते। बाद में तीन विधायक बीजेपी में लौट गए। सहनी को मंत्री पद भी मिला, लेकिन कार्यकाल खत्म होने के बाद मतभेद बढ़ गए।

अब महागठबंधन में सहनी एक बार फिर वही फॉर्मूला दोहराते दिख रहे हैं — कुछ सीटें अपने कोटे से, और कुछ पर दूसरे दलों के उम्मीदवार VIP के टिकट पर।

राजनीतिक समीकरण पर राहुल गांधी की मीटिंग का असर

राहुल गांधी के नेतृत्व में हुई देर शाम की बैठक ने पूरे सीन को बदल दिया। अब माना जा रहा है कि महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे का रास्ता साफ हो सकता है।
सहनी की “प्रेशर पॉलिटिक्स” फिलहाल सफल होती दिख रही है, लेकिन अंतिम तस्वीर अगले 24 घंटों में साफ होगी।

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