हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व आस्था और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है क्योंकि यह नौ नहीं बल्कि दस दिनों तक मनाई जा रही है। इस बार दुर्गा अष्टमी 30 सितंबर को और महानवमी 1 अक्टूबर को पड़ रही है। शास्त्रों के अनुसार अष्टमी और नवमी के दिन का महत्व सबसे अधिक होता है।

कई श्रद्धालु अष्टमी को व्रत का पारण करते हैं, जबकि कुछ लोग नवमी को व्रत खोलना शुभ मानते हैं। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह संशय रहता है कि व्रत का सही समापन कब किया जाए ताकि पूर्ण फल की प्राप्ति हो सके।

व्रत पारण का सही समय
शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि व्रत का पारण जल्दबाजी में करना उचित नहीं है। अष्टमी की रात 12 बजे के बाद व्रत खोलना वर्जित माना गया है।
- यदि किसी ने पूरे नौ दिन का व्रत रखा है तो नवमी की पूजा के बाद ही व्रत पारण करना चाहिए।
- व्रत तोड़ने से पहले कन्या पूजन करना और उन्हें भोजन व उपहार देना अनिवार्य माना गया है।
- पारण के समय केवल सात्विक और हल्के भोजन का ही सेवन करना चाहिए।

किन बातों का रखें ध्यान
नवरात्रि के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी है—
- पूजा स्थल पर कभी भी चमड़े की वस्तुएं जैसे बेल्ट, पर्स या जूते न रखें।
- व्रत पारण के समय लेदर की चीजें अपने पास या शरीर पर न रखें।
- इस पूरे पर्व में झूठ बोलना, किसी का अपमान करना या गलत आदतों में शामिल होना वर्जित है।
- अष्टमी और नवमी के दिन खासतौर पर ध्यान रखें कि किसी का दिल न दुखे।

दुर्गा अष्टमी और महानवमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और नियमों के पालन का संदेश देता है। सही विधि से व्रत पारण करने पर ही साधक को माता रानी का आशीर्वाद और पूर्ण फल प्राप्त होता है।







