भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर नई चिंताजनक स्थिति सामने आई है। शोध बताते हैं कि 70% से ज्यादा भारतीय महिलाएं विटामिन-डी की कमी से पीड़ित हैं। यही वजह है कि 40 साल के बाद उनमें हड्डियां कमजोर होकर फ्रैक्चर का खतरा पुरुषों की तुलना में दोगुना हो जाता है।

क्यों जरूरी है विटामिन-डी?
विटामिन-डी को सनशाइन विटामिन कहा जाता है। यह शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस को अवशोषित करने में मदद करता है, जिससे हड्डियां और दांत मजबूत रहते हैं। साथ ही यह इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखता है और हार्मोनल प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।
अध्ययन बताते हैं कि संतुलित विटामिन-डी स्तर से डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है।

महिलाओं पर असर
विशेषज्ञ कहते हैं कि महिलाओं में विटामिन-डी की कमी से हड्डियों का दर्द, थकान, मांसपेशियों की कमजोरी और मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है। नोएडा के जिला अस्पताल की रिपोर्ट बताती है कि रोज़ाना करीब 100 लोग विटामिन-डी का टेस्ट कराते हैं, जिनमें 70% महिलाएं होती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, विटामिन-डी का सामान्य स्तर 20 से 50 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर होना चाहिए। इससे कम होने पर सप्लीमेंट लेना ज़रूरी हो जाता है।

हड्डियों और गर्भावस्था की दिक्कतें
40 साल की उम्र के बाद महिलाओं में हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। विटामिन-डी की कमी से ऑस्टियोपोरोसिस और बार-बार हड्डियां टूटने की समस्या बढ़ जाती है।
गर्भावस्था के दौरान यह कमी प्रीक्लेम्पसिया (उच्च रक्तचाप), गर्भकालीन मधुमेह और सिजेरियन डिलीवरी का खतरा भी बढ़ा सकती है।

कमी क्यों हो रही है?
विशेषज्ञ बताते हैं कि शहरों में रहने वाली महिलाएं व्यस्त दिनचर्या और धूप की कमी के कारण इस विटामिन से वंचित रह रही हैं। ऑफिस और घरों में लंबे समय तक रहना और आहार में पोषण की कमी मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
कैसे पूरी करें कमी?
- रोज़ाना सुबह 7 से 9 बजे के बीच 15–20 मिनट धूप में रहना सबसे आसान उपाय है।
- आहार में अंडे की जर्दी, फैटी फिश, दूध, डेयरी उत्पाद और मशरूम शामिल करें।
- जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से विटामिन-डी सप्लीमेंट लें।



