जगदलपुर।छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। नारायणपुर-अबूझमाड़ के घने जंगलों में शुक्रवार सुबह हुई मुठभेड़ में छह नक्सली ढेर हो गए। पुलिस ने सभी छह माओवादियों के शव बरामद कर लिए हैं। सुरक्षाबलों का कहना है कि इस ऑपरेशन में कई अन्य नक्सली भी मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
रायपुर में उच्चस्तरीय बैठक
इधर राजधानी रायपुर के मेफ़ेयर होटल में केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी नक्सल विरोधी रणनीति पर मंथन कर रहे हैं। बैठक में हालिया अभियानों की समीक्षा के साथ ही आगे की कार्ययोजना पर भी चर्चा हो रही है।
बस्तर में लगातार दबाव
बस्तर में इस साल नक्सलियों पर लगातार दबाव बनाया गया है। अप्रैल-मई में चले ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट में 31 नक्सली मारे गए थे। जुलाई में अबूझमाड़ इलाके में हुई मुठभेड़ में भी 6 नक्सली ढेर किए गए थे, जिनमें एक डिविजनल कमेटी सदस्य शामिल था। आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अब तक बस्तर में 200 से अधिक नक्सली मारे जा चुके हैं।
शीर्ष नेतृत्व का सफाया
सबसे बड़ी सफलता मई 2025 में मिली, जब संगठन का महासचिव और शीर्ष कमांडर नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू मुठभेड़ में ढेर हुआ। इसके बाद जून में केंद्रीय समिति का वरिष्ठ नेता और विचारधारा प्रमुख सुधाकर उर्फ नरसिम्हा चालन भी मारा गया। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से माओवादी संगठन की पकड़ और मनोबल कमजोर पड़ा है।
माओवादी प्रभाव तेजी से सिमट रहा
दिसंबर 2023 से अब तक राज्य में 453 माओवादी मारे गए, 1,616 गिरफ्तार किए गए और 1,666 ने आत्मसमर्पण किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान माओवादियों के खिलाफ निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। सुरक्षा एजेंसियों का लक्ष्य है कि 2026 तक बस्तर को पूरी तरह नक्सल मुक्त किया जा सके।







