रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित साहित्यकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा शोक सभा का आयोजन किया गया। यह श्रद्धांजलि सभा छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन के ऐतिहासिक स्थल छत्तीसगढ़ी भवन, हांडीपारा, रायपुर में दोपहर 2 बजे आयोजित हुई।
88 वर्ष की आयु में साहित्य जगत को अलविदा कहने वाले विनोद कुमार शुक्ल को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का मजबूत स्तंभ माना जाता है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश और विश्व स्तर पर साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके योगदान ने छत्तीसगढ़ को साहित्यिक मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाया।
शोक सभा में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के सेनानियों, किसान नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए दिवंगत साहित्यकार को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा एवं छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण संग्राम सेनानी संघ के अध्यक्ष अनिल दुबे सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
श्रद्धांजलि देने वालों में दाऊ जी.पी. चंद्राकर, जागेश्वर प्रसाद, दीनदयाल वर्मा, लालाराम वर्मा, चेतन देवांगन, महेंद्र कौशिक, छन्नू साहू, नंदकुमार साहू, विमल ताम्रकार, बृजबिहारी साहू, योगेश पात्रे, जगदम्बिका साहू, भुवन लाल पटेल, धनाराम साहू, परसराम ध्रुव, अशोक कश्यप, नाथूराम सिन्हा, दसरथ सिन्हा, हेमसागर पटेल, डेविड चंद्राकर, लीलाधर पटेल, धर्मेंद्र यादव, चंद्रकुमार यादव, उदय चंद्राकर, शिव प्रकाश मानिकपुरी, सतमन साय, रामसिंग कंवर, टिकेलाल जलक्षत्रि, कुंजलाल चेलक, भुनेश्वर ध्रुव, करण साहू, रूपसिंग निषाद सहित अनेक गणमान्यजन शामिल रहे।
सभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को संवेदनशीलता, मानवता और सामाजिक चेतना का मार्ग दिखाती रहेंगी। उनका जाना छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।



