रीवा जिले में किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। खेतों में बुवाई का समय है, लेकिन खाद की किल्लत ने उनकी मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। हालात ऐसे हैं कि किसानों को रातभर खाद केंद्रों के बाहर लाइन में लगना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे भी अपने परिवार के साथ सड़क किनारे पूरी रात गुजार रहे हैं। बारिश होने पर लोग प्लास्टिक ओढ़कर भीगने से खुद को बचाने की कोशिश करते रहे।
किसानों का कहना है कि सुबह से लेकर देर रात तक इंतजार करने के बाद भी खाद नहीं मिल पा रही। कई बार वे खाली हाथ घर लौटने को मजबूर हो जाते हैं। स्थिति यह है कि जिनके पास थोड़ी बहुत खाद है, वे भी बुवाई के लिए पर्याप्त मात्रा नहीं जुटा पा रहे।
यह समस्या सिर्फ खाद की कमी भर नहीं है, बल्कि इससे पूरे कृषि चक्र पर असर पड़ रहा है। समय पर बुवाई न होने से फसल पर बुरा असर पड़ेगा और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसे हालात में प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह किसानों को आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध कराए।
रीवा की यह तस्वीर किसानों के संघर्ष और व्यवस्था की खामियों दोनों को सामने लाती है। खेतों में मेहनत करने वाले किसान, जो देश का पेट भरते हैं, उन्हें खाद जैसी बुनियादी जरूरत के लिए रातभर जागकर संघर्ष करना पड़ रहा है।



