मध्यप्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया है कि वह न केवल योजना की मूल भावना से छेड़छाड़ कर रही है, बल्कि इसे कमजोर करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान विधायक कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश के करीब 36 लाख मजदूरों का लगभग 575 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक लंबित है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मजदूरों ने अपना काम पूरा कर लिया है, तो उनकी मेहनताना राशि कब तक रोकी जाएगी?
कांग्रेस का दावा है कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर केंद्र को कई बार पत्र लिख चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक संकट गहराने लगा है और मजदूरों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है।
कमलनाथ ने यह भी कहा कि जब भाजपा सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘VBGRAMG योजना’ करने की पहल की थी, तभी कांग्रेस ने चेताया था कि यह केवल नाम परिवर्तन नहीं बल्कि ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने की कोशिश है। उनके अनुसार, मनरेगा जैसी योजना ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ है और इसके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ सीधे गांवों की आजीविका पर असर डालती है।
कांग्रेस ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी।


