नागेन्द्र पाण्डेय, संपादक | रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रदेश बीजेपी की नई कार्यकारिणी बुधवार को आ गई। 47 नए पदाधिकारी बने हैं। पार्टी के मुताबिक यह संगठन विस्तार है, लेकिन देखने से लग रहा कि ये तो रिवर्स मेरिट लिस्ट है, जिसमें इनाम और सज़ा का हिसाब थोड़ा अजीब है।
सच बोलने का इनाम
सबसे बड़ी खबर यह है कि भाजयुमो अध्यक्ष की कुर्सी पर बदलाव हुआ है। रवि भगत आउट, राहुल टिकरिहा इन। वजह? भारतीय जनता पार्टी का तो आधिकारिक बयान तो संगठन की युवा ऊर्जा है, लेकिन मैदान में चर्चा है कि भगत साहब ने हाल ही में अडानी केDMFऔरCSRके कामकाज पर सवाल उठा दिए थे। अब भाई, सवाल पूछना अगर अपराध बन जाए, तो फिर इनाम “कुर्सी छीनना” ही होगा।
दाग अच्छे हैं… बस रंग भगवा होना चाहिए
दूसरी ओर एक पूर्व कोषाध्यक्ष, जिनका नाम कई मामलों में उछला, उन्हें पदोन्नति देकर उपाध्यक्ष बना दिया गया। लगता है, बीजेपी में अब “एंटी-इंटीग्रिटी टेस्ट” पास करना भी एक क्वालिफिकेशन है।
नरेश गुप्ता की सोशल मीडिया डायरी
इन नियुक्तियों के बाद नरेश गुप्ता सोशल मीडिया पर फूट पड़े हैं। उनके पोस्ट में दर्द के साथ एक हल्की सी उम्मीद है कि शायद पार्टी में कोई पढ़ ले।
— Advocate Naresh Chandra Gupta (@nareshgupta1919) August 13, 2025

संगठन विस्तार या भावनाओं का संकुचन?
कुल 4 उपाध्यक्ष, 3 महामंत्री, 8 मंत्री, 4 संगठन सचिव, 6 सह मंत्री और 22 सदस्य बनाए गए हैं। मंत्रियों को विभागवार जिम्मेदारी दी गई है, ताकि पार्टी हर मोर्चे पर सक्रिय रहे। लेकिन सवाल यह है कि अगर पार्टी भीतर से ही मनमुटाव में डूबी है, तो बाहर की लड़ाई कौन लड़ेगा? बीजेपी का यह विस्तार संगठन की मजबूती दिखाने के लिए था, लेकिन फिलहाल यह ज़्यादा “कौन किसको और क्यों हटा गया” वाली बहस में फंसा नज़र आ रहा है। राजनीति में ताज बदलते रहना आम है, लेकिन यहां तो कुछ ताज सवाल पूछने पर गिरा दिए गए और कुछ दागदार ताज चमकाए गए।







