महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को जब सीबीआई की टीम ओमान से भारत लाई, तो कैमरों के सामने उसका ‘पुष्पा’ स्टाइल में खड़ा होना उसके आत्मविश्वास का ही संकेत नहीं लगा, बल्कि इस पूरे घोटाले की गहराई पर भी सवाल खड़े कर दिया।
सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण के बाद पुष्पा स्टाइल में बिना किसी खौफ का दिखना साफ संकेत दे रहा है कि इसमें प्रशासनिक अधिकारियों, राजनीतिक हल्कों और अन्य कारोबारियों की भी कोई भूमिका रही होगी और जिससे उसको संरक्षण मिल रहा था।
एक ऐसा आरोपी, जो वर्षों से देश से बाहर था और जिसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी था, अचानक इतने दबंग अंदाज में सामने आना बताता है कि उसके पीछे केवल एक ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क नहीं, बल्कि एक बड़ा संरक्षण और प्रभाव का तंत्र भी शामिल है।
सीबीआई के अनुसार, सौरभ चंद्राकर को ओमान की रॉयल पुलिस ने रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया था। इसके बाद सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने ओमान सरकार को प्रत्यर्पण का औपचारिक प्रस्ताव भेजा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय के बाद उसे भारत लाया गया। सोमवार को उसे रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाना है।
महादेव ऐप मामला केवल सट्टेबाजी का मामला नहीं है; यह हजारों करोड़ रुपये के लेन-देन, विदेशी नेटवर्क, बैंकिंग चैनल और संभावित धनशोधन से जुड़ा मामला है। जांच एजेंसियों का कहना है कि चंद्राकर सीबीआई के दो मामलों में वांछित था, जिनमें आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं, जबकि ईडी ने भी उसके खिलाफ धनशोधन मामले में अभियोजन शिकायत दर्ज की है।
अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सौरभ चंद्राकर की पूछताछ में यह पता चले कि इतने विशाल नेटवर्क को बिना किसी स्थानीय संरक्षण के इतने लंबे समय तक संचालित कैसे रखा गया। उसके फरार रहने, विदेश में ठिकानों के चलने और बड़े पैमाने पर लेन-देन के बीच प्रशासनिक मशीनरी, नेताओं तथा कारोबारी जगत से जुड़े संदिग्ध संपर्कों की जांच अनिवार्य हो जाती है। जब तक यह परत खुलती नहीं, महादेव सट्टा घोटाले में केवल ऑपरेटरों को पकड़ना आधी सच्चाई ही होगी; असली सवाल यह है कि इस पूरे ढांचे को सुरक्षित रखने वाले कौन थे।






