छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड स्थित प्राथमिक शाला घोड़ासोत में सामने आई एक चौंकाने वाली घटना ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक वीडियो में स्कूल के शिक्षक देश के प्रधानमंत्री और जिले के कलेक्टर का नाम तक नहीं बता पाए, यहां तक कि साधारण अंग्रेजी शब्दों की स्पेलिंग भी गलत लिखी गई।
यह घटना सिर्फ एक शिक्षक की असफलता नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विफलता का आईना है। जिन हाथों में बच्चों के भविष्य की बागडोर होनी चाहिए, वही अगर मूलभूत ज्ञान से वंचित हों, तो शिक्षा का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है।
सरकार भले ही हर साल नई-नई योजनाएं और बजट शिक्षा सुधार के नाम पर लाए, लेकिन अगर निगरानी और जिम्मेदारी तय नहीं की गई, तो सब कुछ कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों की यह कड़वी सच्चाई है कि वहां आज भी शिक्षा सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है।
इस लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना होगा, जो शिक्षा से वंचित रहकर समाज और देश की प्रगति में पीछे छूट जाएंगी। समय की मांग है कि प्रशासन सख्त निगरानी करे और जिम्मेदारों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



