छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर प्रदेश के वन्यजीव पर्यटन को दोहरी सौगात मिली है। 1 नवंबर को प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बस्तर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली बार जंगल सफारी का शुभारंभ किया। इसी के साथ मुंगेली जिले के अचानकमार टाइगर रिजर्व में केंवची गेट से बफर सफारी भी पर्यटकों के लिए शुरू हो गई है और सफारी की बुकिंग प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में यह सफारी लगभग तीन दशक के लंबे अंतराल के बाद शुरू हुई है। वर्षों तक वामपंथी उग्रवाद और सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावित रहे बस्तर क्षेत्र में अब पर्यटन के नए द्वार खुल रहे हैं। पर्यटक यहां घने जंगलों में बाघ, राजकीय पशु वन भैंसा, गौर, चीतल, तेंदुआ, ऊदबिलाव तथा भारतीय और सफेद पीठ वाले गिद्ध जैसे दुर्लभ वन्यजीवों को करीब से देखने का अवसर पाएंगे।


इंद्रावती में जंगल सफारी का प्रारंभिक बिंदु बीजापुर जिले के उलूर गांव को बनाया गया है, जो जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है। पर्यटक बीजापुर से भोपालपटनम होते हुए उलूर पहुंचेंगे, जहां से विशेष रूप से तैयार जिप्सी वाहनों में जंगल भ्रमण करेंगे। प्रथम चरण में चार जिप्सी वाहन उपलब्ध रखे गए हैं और पर्यटकों को टूर गाइड के साथ चाय-नाश्ते की सुविधा भी दी जाएगी।
इस इको-टूरिज्म पहल का संचालन स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी से किया जा रहा है। स्थानीय युवाओं को कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे नेचर गाइड और सफारी वाहन चालक के रूप में कार्य कर सकें। होम-स्टे, स्थानीय व्यंजन और बस्तर के हस्तशिल्प को भी इस पहल से नया बाजार मिलने की उम्मीद है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

दूसरी ओर, अचानकमार टाइगर रिजर्व में केंवची गेट से बफर सफारी की शुरुआत हुई है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही से अमरकंटक मार्ग पर स्थित यह गेट इस वर्ष पहली बार पर्यटकों के लिए खोला गया है। इससे पहले पर्यटक शिवतराई गेट से ही टाइगर रिजर्व में प्रवेश कर पाते थे, लेकिन अब उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार दोनों गेटों का विकल्प मिल गया है।
अचानकमार टाइगर रिजर्व 914.017 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसमें कोर जोन 626.195 वर्ग किलोमीटर और बफर जोन 287.822 वर्ग किलोमीटर शामिल है। केंवची गेट से शुरू होने वाली सफारी का रूट लगभग 50 किलोमीटर लंबा है, जो भैरोसांगफाटर, सेमर वॉच टावर, कचांदी रोड, जलांगो तिराहा, दरियाबूट पेट्रोलिंग कैंप और आमाडोब बैरियर होते हुए वापस केंवची गेट तक जाएगा।
अचानकमार में सफारी के लिए एक जिप्सी वाहन 3,500 रुपये प्रति राउंड और तीन महारानी वाहन 5,000 रुपये प्रति राउंड के किराए पर उपलब्ध रहेंगे। पर्यटकों के ठहरने के लिए केंवची गेट के निकट पर्यटन विभाग का सोनभद्र रिसोर्ट तथा कई निजी रिसोर्ट मौजूद हैं। यहां पर्यटक बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर, चीतल, सांभर, सोनकुत्ता, जंगली सूअर, मोर और मनियारी नदी के ऊदबिलाव देख सकते हैं।
केंवची गेट के खुलने से अमरकंटक-अचानकमार-रतनपुर पर्यटन सर्किट को नया आकार मिलने की संभावना है। मानसून के दौरान बंद रही पर्यटन और इको-टूरिज्म गतिविधियां भी अब पुनः शुरू हो गई हैं। रिसोर्ट, होटल, होम-स्टे, रेस्टोरेंट, सोवेनियर शॉप तथा प्रशिक्षित गाइडों और चालकों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
वन मंत्री केदार कश्यप की पहल से शुरू हुई ये दोनों सफारी सेवाएं छत्तीसगढ़ को वन्यजीव पर्यटन के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने में सहायक मानी जा रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इंद्रावती और अचानकमार में शुरू हुई यह पहल क्षेत्र के विकास, शांति, स्थानीय रोजगार और प्रकृति संरक्षण का एक प्रभावी मॉडल बन सकती है।






