राजनांदगांव।लोक निर्माण विभाग यानी PWD अब एक बार फिर सवालों के घेरे में है। करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से बन रही राजनांदगांव-खैरागढ़ सड़क अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुई, लेकिन उसकी पहली डामर परत कई जगह उखड़ चुकी है। जहां डामर गिरा है, वहां नीचे की गिट्टी साफ दिख रही है और सड़क ऊबड़-खाबड़ हो गई है। यानी जिस विभाग पर जनता के पैसे से बेहतर सड़क बनाने की जिम्मेदारी है, वही अब यह समझाने को मजबूर है कि नई सड़क की पहली परत इतनी जल्दी क्यों बिखर गई।
PWD का कहना है कि पहली डामर परत के बाद तेज बारिश और पानी भरने से कुछ हिस्से खराब हुए हैं। खैरागढ़ की उप अभियंता स्मारिका तिवारी के मुताबिक क्षतिग्रस्त हिस्सा हटाकर दोबारा डामरीकरण किया जाएगा और सड़क पर अभी दो परतें और बिछानी हैं। लेकिन सवाल यह है कि अगर सिर्फ बारिश ही जिम्मेदार थी, तो क्या PWD को यह पहले से पता नहीं था कि छत्तीसगढ़ में बारिश होगी? क्या सड़क बनाने से पहले मौसम, सामग्री और तकनीकी मानकों का हिसाब नहीं रखा गया?
मामला सिर्फ उखड़े डामर तक नहीं है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक राजनांदगांव के उपाध्यक्ष भरत लाल वर्मा ने सितंबर 2026 में राजनांदगांव-खैरागढ़ और राजनांदगांव-मोहला-मानपुर सड़क परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार व गुणवत्ताहीन निर्माण की शिकायत की थी। शिकायत में सामग्री, मोटाई, कॉम्पैक्शन और निगरानी की कमी के सवाल उठाए गए हैं। यानी अब सिर्फ यह नहीं पूछा जा रहा कि सड़क कैसी दिख रही है, बल्कि यह भी पूछा जा रहा है कि उसे बनाते समय PWD की निगरानी कहां खई गई।
शिकायत के बाद PWD के प्रमुख अभियंता ने 2 अक्टूबर 2026 को चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को तीन दिन में रिपोर्ट देनी है। जांच में GSB, WMM, सबग्रेड, डामरीकरण, बिटुमिन की मात्रा, सड़क की मोटाई, घनत्व, ग्रेडेशन, लेवल और एग्रीगेट जैसे तकनीकी पहलुओं की प्रयोगशाला से जांच कराई जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कार्य एजेंसी ने कितनी ईमानदारी से अपनी भूमिका निभाई।
PWD के आदेश में कहा गया है कि अगर गुणवत्ता में समझौता, वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार साबित होता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने तक संबंधित कार्यों के भुगतान पर रोक लगाने पर भी विचार किया जा रहा है। डोंगरगांव-कुमरदा सहित जिन जगहों पर सड़क उखाड़कर छोड़ दी गई है, वहां तत्काल मरम्मत, चेतावनी संकेत और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अब तीन दिन के बाद आने वाली रिपोर्ट तय करेगी कि सड़क खराब होने की वजह सच में बारिश और पानी थी, या PWD की निगरानी और निर्माण प्रक्रिया में कोई और कहानी छिपी है। फिलहाल तो यही साफ है कि 90 करोड़ की सड़क पर डामर अभी पूरा नहीं बिछा, लेकिन जवाबदेही का हिसाब शुरू हो चुका है।





